भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 के प्रथम चरण को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav रहे। मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आए प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए जनगणना की महत्ता, इसकी शुद्धता और भविष्य की विकास योजनाओं में इसकी भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनगणना-2027 देश की आठवीं जनगणना है, जो सामान्यतः 10 वर्षों के अंतराल पर 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें विलंब हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना की सटीकता और बारीक आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य में सड़क, अस्पताल, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का रोडमैप तैयार किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि जनगणना को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर इसे भविष्य के विकास का मजबूत आधार समझते हुए पूरी गंभीरता से संपन्न किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि मजरा-टोला और ‘बेचिराग’ (निर्जन) गांवों की गणना भी पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से की जाए। उन्होंने कहा कि चंबल और विंध्य जैसे क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट परिस्थितियां हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और प्रतिबद्ध तरीके से जनगणना कराई जानी चाहिए।

डॉ. मोहन यादव ने विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों में अधिकारियों को संवेदनशील रवैया अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन स्थानीय निवासियों की भावनाओं और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा-“हमारी संवेदना स्थानीय बासिंदों के साथ भी है।”

मुख्यमंत्री ने वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में रेखांकित करते हुए बताया कि 7 मार्च से शुरू होने वाले गेहूं उपार्जन में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे उड़द और मूंगफली को बढ़ावा देने तथा ‘नरवाई’ (पराली) जलाने की प्रथा को शून्य पर लाने का लक्ष्य भी अधिकारियों के सामने रखा।

होली और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख त्योहारों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने शांति समितियों के माध्यम से आपसी सौहार्द बनाए रखने, मिलावटखोरी पर सख्त नजर रखने और ‘आदर्श होली’ के आयोजन पर जोर दिया। इसके साथ ही 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान जिलों में शांति व्यवस्था बनाए रखने और विधानसभा प्रश्नों के समयबद्ध उत्तर देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति को ध्यान में रखते हुए खनिज, पंजीयन और आबकारी विभागों से अपने राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि 1931 के बाद, लगभग 96 वर्षों के अंतराल पर इस प्रकार की सामाजिक स्तर की जनगणना एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनेगी। यह न केवल प्रशासनिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक नीति निर्माण के लिए भी मील का पत्थर सिद्ध होगी।

जनगणना-2027 के प्रथम चरण की इस राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में मंच पर मुख्य सचिव अनुराग जैन, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडोई, एस. एस. शिव शेखर, अभिषेक सिंह और कार्तिकेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रदेश के सभी संभागों और जिलों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी, कलेक्टर, कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सभी को संबोधित करते हुए जनगणना की पारदर्शिता, शुद्धता और इसके आधार पर भविष्य में बनने वाले बुनियादी ढांचे के महत्व पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य संबोधन, एक नज़र में-