देश की राजधानी दिल्ली में जितने तेजी से मामले सामने आ रहे है उतनी ही तेजी से मरीज ठीक भी हो रहे है। अब दिल्ली में अगस्त के पहले सप्ताह में रिकवरी दर 90 फ़ीसदी से ज्यादा हो गई थी और यह स्थिति दिल्ली में 15 अगस्त को इसी के आसपास बनी हुई थी।
जिसके बाद दिल्ली सरकार ने जांच की संख्या बढ़ाकर चार गुना कर दिया है। इससे दैनिक मामलों में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। संक्रमण के नए मरीजों के मुकाबले ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कम होने लगी थी। जिससे रिकवरी रेट में गिरावट आई थी।
LNJP से 8000 कोरोना मरीज़ हुए डिस्चार्ज, माननीय मुख्यमंत्री श्री @ArvindKejriwal जी ने कहा, "हमें अस्पताल के डॉक्टर्स, नर्स और पूरे स्टाफ़ पर गर्व है" pic.twitter.com/ok1mq33RXq
— CMO Delhi (@CMODelhi) October 5, 2020
इससे रिकवरी दर घटते हुए सितंबर के दूसरे सप्ताह में 84 फ़ीसदी के आस पास पहुंच गई थी। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सात दिन में 20446 लोग संक्रमण से स्वस्थ हुए हैं, जो इस दौरान मिले कुल 19218 संक्रमितों से ज्यादा है। स्वस्थ होने वाले मरीजों के बढ़ने से रिकवरी दर भी बढ़कर 89.6% हो गई है।
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि रिकवरी दर उस समय इसलिए कम हो गई थी, क्योंकि औसतन 4200 दैनिक मामले आ रहे थे। उसके मुकाबले कम मरीज ठीक हो रहे है। अब हालात बदल रहे हैं और रोजाना 3500 मरीज ठीक हो रहे हैं।
Positivity rate down from 6.7% to 5.2% over past 2 weeks, active cases also dip in Delhi. pic.twitter.com/x56fbD5n0d
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उन्होंने आगे कहा की रिकवरी दर का फिर से बढ़ना और 90 फ़ीसदी के करीब पहुंचना यह दर्शाता है कि अब देशवासी एक जुट होकर कोरोना से लड़ रहा है। डॉ प्रवीण के मुताबिक, सरकार ने जिस हिसाब से रोजाना 60 हजार जांच की है।
उससे संक्रमण पर लगाम लगाने में काफी हद तक मदद मिली है। इसके साथ ही होम आइसोलेशन में दी जा रही बेहतर सुविधाओं का भी काफी लाभ मिला है।विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने और रिकवरी दर बढ़ने में लगातार कंटेनमेंट जोन बनाने की रणनीति का काफी लाभ मिला है।
🏥Delhi Health Bulletin – 3rd October 2020🏥#DelhiFightsCorona pic.twitter.com/tLicO0US19
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नई रणनीति के तहत रोजाना औसतन 60 कंटेनमेंट जोन बनाए गए। यहां संक्रमितों के संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेट किया गया। इससे समय रहते सभी लोगों को इलाज मिल गया और वह ठीक हो गए। इसके अलावा अस्पतालों में आईसीयू और नॉर्मल बेड बढ़ाने का भी काफी लाभ मिला है।