Home विदेश ब्रिटिश अदालत ने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को जमानत देने से इन्कार कर दिया

ब्रिटिश अदालत ने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को जमानत देने से इन्कार कर दिया

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लंदन: ब्रिटिश अदालत ने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। जज ने अंदेशा जताया है कि अगर उसे जमानत दी जाती है तो उसके भागने का खतरा है। बता दें कि सोमवार को इसी अदालत ने असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध ठुकरा दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर ऐसा किया गया तो ना केवल वह खुदकुशी कर सकता है बल्कि उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए ऐसा करना दमनकारी होगा।

डिस्टि्रक्ट जज वेनेसा बराइटर अपने आदेश में कहा, ‘मैं इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हूं कि अगर असांजे को रिहा किया गया तो वह दोबारा कोर्ट में दिखाई देगा।’ उधर, अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह असांजे के प्रत्यर्पण को लेकर अपनी कोशिश जारी रखेगा। इस संबंध में उसने बुधवार को एक याचिका कोर्ट में दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

एक दशक पहले सैन्य और राजनयिक दस्तावेजों के प्रकाशन के मद्देनजर विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को अमेरिका में जासूसी के 17 आरोपों और कंप्यूटर दुरुपयोग के एक आरोप का सामना करना रहा है। अगर यह आरोप साबित होते हैं तो उनको अधिकतम 175 वर्ष जेल की सजा हो सकती है।

इस बीच मेक्सिको ने विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को पनाह देने की पेशकश की है। राष्ट्रपति आंद्रेज मैनुएल लोपेज ओब्रादोर ने बीते दिनों कहा था कि वे अपने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से ब्रिटेन से सपंर्क करने को कहेंगे ताकि असांजे की रिहाई की संभावना का पता लगाया जा सके। अगर उनकी रिहाई हो जाती है, तो उन्हें मेक्सिको में शरण दे दी जाएगी। ब्रिटिश अदालत से असांजे को माफ करने का भी अनुरोध किया जाएगा।

माना जा रहा है कि कई और देश असांजे को शरण देने की पेशकश कर सकते हैं। ऐसे प्रस्ताव लैटिन अमेरिकी देशों की तरफ से आ सकते हैं। बता दें कि सोमवार को ब्रिटेन की अदालत ने अमेरिका द्वारा असांजे का प्रत्यर्पण किए जाने का अनुरोध ठुकरा दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यदि ऐसा किया गया तो असांजे खुदकुशी कर सकता है। ऐसा करना दमनकारी होगा। लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास में सात वर्ष बिताने वाले 49 वर्षीय असांजे अमेरिका में 18 आरोपों का सामना कर रहे हैं।

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