बिकरू कांड : विकास दुबे मामले में एसआईटी ने रिपोर्ट सौंपी
कानपुर के जघन्य बिकरू कांड में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट बुधवार को शासन को सौंप दी है। इसमें 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। जांच रिपोर्ट में पुलिस की गंभीर चूक उजागर की गई है।
रिपोर्ट पर शासन में मंथन शुरू हो गया है। दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मचारियों में से कुछ पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। शेष पर जल्द कार्रवाई होने की संभावना है।
अपर मुख्य सचिव संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित इस एसआईटी ने काफी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जो लगभग 3200 पृष्ठों की है। एसआईटी को कुल नौ बिन्दुओं पर जांच करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था।
सूत्रों के अनुसार जिन 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है, उनमें से 60 फीसदी पुलिस विभाग के ही हैं। शेष 40 फीसदी प्रशासन, राजस्व, खाद्य एवं रसद तथा अन्य विभागों के हैं।
रिपोर्ट में प्रशासन व राजस्व विभाग के अधिकारियों के स्तर से भी कुख्यात विकास दुबे को संरक्षण दिए जाने की बात कही गई है। दागियों को शस्त्र लाइसेंस, जमीनों की खरीद-फरोख्त और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश न लगाए जाने के कई मामलों को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
गत दो जुलाई को बिकरू कांड में आठ पुलिस कर्मियों के मारे जाने और 10 जुलाई को मुख्य अभियुक्त गैंगस्टर विकास दुबे के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के बाद 11 जुलाई को एसआईटी का गठन किया गया था। इसमें एडीजी एचआर शर्मा और डीआईजी जे. रवीन्द्र गौड़ सदस्य बनाए गए थे। एसआईटी को पहले 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 अगस्त कर दिया गया।
हालांकि जांच का दायरा व्यापक होने के कारण एसआईटी के अनुरोध पर फिर समयसीमा बढ़ाई गई। अंतत: लगभग तीन महीने से भी ज्यादा समय लेने के बाद एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की।
इस बीच एसआईटी ने विकास दुबे और उसके गैंग के सहयोगियों की संपत्तियों और उसके सहयोगी रहे सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के बारे भी दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए। साथ ही घटना से जुड़े विभिन्न बिन्दुओं के साथ ही गहन अभिलेखीय एवं स्थलीय जांच भी की।