देश में छोटे सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों में मिलाने का काम मोदी सरकार ने पूरा कर दिया है और अब मोदी सरकार बैंकों के निजीकरण पर विचार कर रही है। दरअसल एक रिपोर्ट में सरकार से कहा गया है कि उसके पास 5 से अधिक सरकारी बैंक नहीं होने चाहिए।
खबरों की माने तो सरकार पहली योजना के तहत बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक का निजीकरण कर सकती है।
एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक और यूनियन बैंक को ही सरकार अपने पास रखने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
पिछले साल सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का 4 बैंकों में विलय कर बड़े बैंक का निर्माण किया था। आपको बता दे कि बैंकों का एनपीए फिलहाल 9 लाख करोड़ के पास है जो कोरोना संकट के कारण 10 लाख करोड़ जा सकता है।