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Nepal Crisis : नेपाल हिंसा के बाद बंगाल और केंद्र सरकार सतर्क; सुरक्षा पर राजनीतिक तल्खी से बनाई दूरी

Nepal Crisis : नेपाल की हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी।ममता बनर्जी और पीएम मोदी ने राजनीतिक मतभेद भुलाकर एकजुटता दिखाई।सीमा पर सुरक्षा बढ़ी, खुफिया एजेंसियां नेपाल में चीनी प्रभाव को लेकर सतर्क हैं।

By: RNI Hindi Desk 
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Nepal Crisis : नेपाल हिंसा के बाद बंगाल और केंद्र सरकार सतर्क; सुरक्षा पर राजनीतिक तल्खी से बनाई दूरी

नेपाल में हाल ही में भड़की राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। खासकर पश्चिम बंगाल, जो नेपाल के साथ करीब 100 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, संवेदनशील स्थिति में है। इस इलाके में सिलीगुड़ी का ‘चिकन नेक’ क्षेत्र भी आता है, जिसे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां की हलचल सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती है। यही कारण है कि नेपाल में जनरेशन जेड के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों और उथल-पुथल के बीच बंगाल सरकार और केंद्र ने अपने मतभेद भुलाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

नेपाल में सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बावजूद भारत ने अपनी सतर्कता कम नहीं की है। पिछले हफ्ते हुए उपद्रव के बाद से सीमा पर सुरक्षा और सख्त कर दी गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस मुद्दे पर साफ किया कि “ये राष्ट्रीय हित का विषय है और इसमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में कोई मतभेद नहीं है। हमें सुरक्षा के सवाल पर एकजुट रहना चाहिए।” यह बयान अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बंगाल की राजनीति में टीएमसी और भाजपा आमने-सामने हैं, मगर इस बार दोनों ने सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हालिया बंगाल दौरे में किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का जिक्र न करके यही संकेत दिया कि सुरक्षा जैसे मुद्दे पर एकजुटता जरूरी है। पहली बार पूर्वी कमान के मुख्यालय फोर्ट विलियम में कोर कमांडरों की एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हुए। इसे सुरक्षा मसले पर केंद्र और राज्य की साझा रणनीति का अहम संकेत माना जा रहा है।

जमीनी स्तर पर भी सुरक्षा इंतजाम कड़े किए गए हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) की अतिरिक्त तैनाती की गई है। सेना और खुफिया एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य पुलिस मिलकर पानीटंकी में भारत-नेपाल को जोड़ने वाले पुल पर कड़ी चौकसी रख रहे हैं। राज्य की खुफिया शाखा नियमित तौर पर अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को भेज रही है। मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख लगातार केंद्र के गृह मंत्रालय के संपर्क में हैं।

सूत्रों के अनुसार, काठमांडू के बाजारों में चीनी मुद्रा के प्रचलन की खबरों ने भारतीय एजेंसियों को चिंतित कर दिया है। इससे नेपाल में चीनी प्रभाव की बढ़ती मौजूदगी का अंदेशा है। भले ही हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिला हो, मगर खुफिया एजेंसियां इस संभावित खतरे को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

दरअसल, बंगाल की भौगोलिक स्थिति इस पूरे परिदृश्य को और भी संवेदनशील बना देती है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ न केवल उत्तर-पूर्वी भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला इकलौता मार्ग है, बल्कि यह चीन, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के नजदीक भी है। यहां किसी भी अस्थिरता का असर व्यापक हो सकता है। यही वजह है कि पहली बार ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच सुरक्षा पर इस तरह की तालमेल और सहमति देखने को मिल रही है।

नेपाल की राजनीतिक हलचल ने भले ही पड़ोसी देश की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हों, लेकिन भारत ने इससे सबक लेते हुए सुरक्षा के मोर्चे पर एकजुटता दिखा दी है। बंगाल और केंद्र सरकार का यह साझा कदम न केवल सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा के लिहाज से अहम है बल्कि यह भी संकेत देता है कि जब बात राष्ट्रीय हित की हो, तो राजनीति पीछे छूट सकती है।

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