बड़वानी शहर में चल रहे सीवरेज कार्य की धीमी रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर सामने आई। गुरुवार को झंडा चौक शिव मंदिर के सामने सीवरेज लाइन और चैंबर निर्माण के लिए लगभग छह मीटर गहरा गड्ढा खोदते समय मुख्य पेयजल लाइन टूट गई। शुक्रवार सुबह जैसे ही जलसप्लाई शुरू हुई, चैंबर के लिए बनाए गए गड्ढे में पानी तेजी से भर गया और देखते ही देखते हजारों लीटर शुद्ध पेयजल व्यर्थ बह गया।
गड्ढे से पानी निकालने के बाद भी ड्रेनेज का पानी उसमें भरता रहा, जिससे स्थिति और अधिक खराब हो गई। पाइप फूटने से तुलसीदास मार्ग, रानीपुरा महालक्ष्मी मंदिर क्षेत्र, राजेंद्र मार्ग, नीमपुरा और हनुमान मंदिर क्षेत्र के कई मोहल्लों में जलसप्लाई बाधित हो गई। स्थानीय लोगों को अब एक-दो दिन और परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
अधिकारियों का निरीक्षण, ठेका कंपनी को लगाई फटकार
काम में देरी, पाइप फूटने और बिना सावधानी गड्ढा खोदने की शिकायतों पर MPUDC के अधिकारी, इंजीनियर और ठेका कंपनी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद फील्ड अधिकारियों-कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कार्य में तेजी और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही से न केवल शहर का पानी बर्बाद हुआ, बल्कि कई मोहल्लों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। सीवरेज परियोजना पहले ही देरी से चल रही है, ऐसे में बार-बार होने वाली गलतियाँ काम को और पीछे धकेल रही हैं।
व्यापारियों को भारी नुकसान, रात में भी कराएं निर्माण कार्य
मुख्य बाजार क्षेत्र में कछुआ गति से हो रहे कार्य ने स्थानीय व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। दुकानदार कुलदीप राठौड़ ने बताया कि पाइप डालने और चैंबर निर्माण के लिए लंबे समय से गड्ढे खोदे जा रहे हैं, लेकिन जहां काम पूरा हो चुका है, वहां रोड को समतल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा- “मार्ग ऊबड़-खाबड़ होने से ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पाते। कई दिन से व्यापारी आर्थिक संकट झेल रहे हैं। यह प्रमुख बाजार है, यहां दिन-रात काम कर जल्द से जल्द कार्य पूरा किया जाना चाहिए।” व्यापारियों का कहना है कि लगातार बाधित आवागमन और गंदगी से ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। इससे बाजार की आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
जल्द सुधार न हुआ तो बढ़ेगी समस्या
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद सप्लाई बंद होने से दैनिक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। यदि मरम्मत कार्य में तेजी नहीं आई तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और ट्रैफिक समस्या भी बढ़ सकती है।