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Varanasi: दंड विधान और भैरव अष्टक जाप के साथ अमित शाह ने की वाराणसी में पूजा, पुजारी ने उतारी नजर

Varanasi: वाराणसी के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का नजर उतारते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह नजर उतारना काशी की एक विशेष और प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जिसे ‘भैरव दंड विधान’ कहा जाता है। अमित शाह ने पूजा-अर्चना के दौरान भैरव अष्टक मंत्रों का पाठ किया और कपूर आरती की। पुजारी पप्पू दुबे के अनुसार, यह उनकी चौथी बार मंदिर में पूजा थी और हर बार वे इसी विधि का पालन करते हैं। इस परंपरा को नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और साहस की प्राप्ति के रूप में माना जाता है।

By: RNI Hindi Desk 
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Varanasi: दंड विधान और भैरव अष्टक जाप के साथ अमित शाह ने की वाराणसी में पूजा, पुजारी ने उतारी नजर

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे वाराणसी के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना करते और पारंपरिक विधि से नजर उतारवाते नजर आ रहे हैं। यह विशेष अनुष्ठान काशी की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा है, जिसे ‘भैरव दंड’ के नाम से जाना जाता है। अमित शाह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दो दिवसीय काशी दौरे पर थे और इस दौरान उन्होंने काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की।

पूजा के समय मंदिर के पंडित पप्पू दुबे द्वारा शाह की नजर उतारी गई। उन्होंने ‘भैरव दंड’ से नजर उतारते हुए इस शुभ परंपरा का निर्वहन किया। यह परंपरा काशी में शुभ और सुरक्षा की कामना के लिए निभाई जाती है और ऐसी मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों, नजर दोष और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

मंदिर के मुख्य पुजारी विजय दुबे के अनुसार, गृहमंत्री की पूजा ‘भैरव अष्टक विधि’ से कराई गई। इस विधि में विशेष मंत्रों और पाठ का आयोजन होता है, जिससे व्यक्ति को मानसिक बल, आत्मिक शक्ति और बुरी शक्तियों से रक्षा मिलती है। पूजा के क्रम में सबसे पहले मंगला अर्चना की गई। फिर फूल और माला को अमित शाह के हाथ से स्पर्श करवाकर बाबा को अर्पित किया गया। इसके बाद मिट्टी के पात्र में तेल से नजर उतारकर गृहमंत्री ने दीप प्रज्वलित किया और कपूर से आरती की। पूजा के अंत में उन्हें भैरव बाबा का कलावा, रुद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र प्रसाद के रूप में भेंट किया गया।

पंडित पप्पू दुबे ने बताया कि वे पिछले 17 वर्षों से इस परंपरा को निभा रहे हैं और अमित शाह इससे पहले भी चार बार काल भैरव मंदिर आ चुके हैं और हर बार इसी तरह नजर उतरवाते हैं। उन्होंने बताया कि काल भैरव का ‘दंड विधान’ सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह शिवपुराण के अनुसार एक शक्तिशाली रक्षा विधान है। मान्यता है कि काशी में मृत्यु के बाद यमराज का नहीं, बल्कि काल भैरव का अधिकार होता है और वे ही आत्मा के न्याय का कार्य करते हैं।

यह धार्मिक यात्रा सिर्फ आस्था का प्रदर्शन नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का एक भावनात्मक पहलू भी है। काशी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक नगर में राष्ट्रीय नेताओं का इस प्रकार जुड़ाव भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान और उनकी पुनर्स्थापना की दिशा में एक सकारात्मक संकेत देता है। अमित शाह की यह पूजा-अर्चना न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व के आध्यात्मिक पक्ष की भी झलक प्रदान करती है।

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