बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अब पूरी तरह से रथ पूरब फतह की ओर घुमा लिया है। ऐसे में 19 और 20 दिसंबर का दिन बंगाल के लिए अहम होने वाला है।
18 दिसंबर की रात अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे और उनका यह दौरा गेम चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि यह हिसाब तारीखें ही अपने खाते में लिखेंगी कि अमुक दिन किस योद्धा ने किस तरह का खेल बदला और किसका खेल बिगाड़ा।
खैर, खेल और खिलाड़ी को छोड़कर फिलहाल इस बात पर ध्यान रखते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेता और गृहमंत्री अमित शाह कोलकाता पहुंच रहे हैं तो इसे बीते दिनों TMC के कार्यकर्ताओं की ओर से हुई गुंडागर्दी का भी हिसाब समझा जाएगा।
अमित शाह शुक्रवार 18 दिसंबर की रात कोलकाता पहुंच जाएंगे। इसके बाद उनका दो दिनों का व्यस्त कार्यक्रम रहेगा। जिसमें वह आध्यात्म, भक्ति, राजनीति और कूटनीति को बराबर समय देंगे।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में अगले प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। चुनावी तैयारियों का जायजा लेने और उन्हें और तेज करने की योजना के तहत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार रात को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे।
अमित शाह का दौरा कई अन्य मायनों में भी अहम है। दरअसल इस नाजुक हालत में जहां TMC अपने पांव जमाए रखने के लिए हर जोर लगा रही है, तो वहीं उसका किला कहीं-कहीं दरक भी रहा है।
करीब महीने भर पहले अमित शाह ने कोलकाता में बंगाल विधानसभा की 294 में से 200 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ ही बीजेपी के चुनावी अभियान को हरी झंडी दिखाई थी।यह भी सामने आ रहा है कि अमित शाह के इस दौरे के दौरान TMC के बागी नेता सुवेंदु अधिकारी बीजेपी में शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
अमित शाह के दौरे से पहले कल ही टीएमसी छोड़ने वाले आसनसोल के विधायक जितेन्द्र तिवारी अपने दो अन्य बागी नेताओ के साथ आज कोलकाता रवाना हो गए। उनके साथ पार्टी छोड़ने वाले अभिजीत आचार्या और अमित तुलसियान भी कोलकाता उनके साथ गए है।
हालांकि जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि वो कोलकाता अपनी बेटी से मिलने जा रहे है। लेकिन एक तरफ कोलकाता में आ रहे गृह मंत्री अमित शाह और दूसरी तरफ तिवारी का अपने समर्थकों के साथ कोलकाता जाना किसी अन्य समीकरण की ओर से इशारा कर रहे है।
अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने अपने अभियान में युद्ध स्तर पर तेजी लाते हुए केंद्रीय मंत्रियों, एक उपमुख्यमंत्री और कई केंद्रीय नेताओं को विभिन्न मोर्चों पर तैनात किया है और उन्हें छह से सात संसदीय क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है।
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस सप्ताहांत राज्य का दौरा करेंगे वहीं केंद्रीय मंत्रिपरिषद के उनके सहयोगी गजेन्द्र सिंह शेखावत, संजीव बालियान, प्रह्लाद पटेल, अर्जुन मुंडा और मनसुख भाई मांडविया अगले कुछ दिनों के भीतर प्रदेश का दौरा करेंगे।
जेपी नड्डा और कैलाश विजयवर्गीय पर हुए हमले से सबक लेते हुए अमित शाह के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों चौकस हो गईं हैं। गृहमंत्री अमित शाह के सुरक्षा घेरे को पहले और भी ज्यादा मजबूत किया जा रहा है।
गृहमंत्री के नजदीकी और बाहरी सुरक्षा घेरे में पहले के मुकाबले जवानों की संख्या बढ़ाई जा रही है। गृहमंत्री की सुरक्षा का बड़ा हिसा केंद्रीय सुरक्षाबलों के जिम्मे होगा। रोड शो और जनसभा के दौरान आने वाले लोगों की सघन तलाशी ली जाएगी। सिविल ड्रेस में भी सुरक्षाबलों के जवान भीड़ के बीच में मौजूद रहेंगे।
अमित शाह के दौरे से पहले कल ही टीएमसी छोड़ने वाले आसनसोल के विधायक जितेन्द्र तिवारी अपने दो अन्य बागी नेताओ के साथ आज कोलकाता रवाना हो गए। उनके साथ पार्टी छोड़ने वाले अभिजीत आचार्या और अमित तुलसियान भी कोलकाता उनके साथ गए है।
हालांकि जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि वो कोलकाता अपनी बेटी से मिलने जा रहे है। लेकिन एक तरफ कोलकाता में आ रहे गृह मंत्री अमित शाह और दूसरी तरफ तिवारी का अपने समर्थकों के साथ कोलकाता जाना किसी अन्य समीकरण की ओर से इशारा कर रहे है।