शिवपुरी। जिले की पिछोर तहसील के ग्राम करमई कला में नामांतरण प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। एक विधवा महिला ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार और फर्जी नामांतरण का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता धनिया आदिवासी का कहना है कि सर्वे नंबर 160, 161, 176, 178 और 621 की लगभग 2.05 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण के लिए संबंधित पटवारी द्वारा 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। आरोप है कि राशि न देने पर उनका नामांतरण नहीं किया गया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उनके नाम पर नामांतरण करने के बजाय कथित रूप से जमीन का नामांतरण उनके दिवंगत पति के भाई के नाम कर दिया गया। उनका कहना है कि उनके पति का निधन हो चुका है और वैध उत्तराधिकारी के रूप में वह और उनकी पुत्री ही वास्तविक हकदार हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बिना किसी सक्षम आदेश और प्रक्रिया के जमीन का नामांतरण कर दिया गया, जिससे उन्हें अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। पीड़िता ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और कथित फर्जीवाड़ा बताया है।

धनिया आदिवासी ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कलेक्टर से दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा वास्तविक वारिसों के नाम भूमि दर्ज कराने की अपील की है।
मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि गरीब और कमजोर वर्ग को न्याय मिल सके।