मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान कल्याण वर्ष के संबंध में संबोधन देते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों की समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान कल्याण वर्ष केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि खेती, सिंचाई, फसल सुरक्षा, बाजार और आय बढ़ाने की व्यावहारिक कार्ययोजना है, जिसे जोन-वाइज लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, चंबल और महाकौशल जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, फसल चक्र और जल उपलब्धता अलग-अलग हैं। इसलिए किसान कल्याण योजनाओं को जोन-वाइज रणनीति के तहत लागू किया जाएगा, ताकि हर क्षेत्र के किसान को उसकी जरूरत के अनुसार लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा क्षेत्र में गेहूं, सोयाबीन और उद्यानिकी फसलों पर, जबकि निमाड़ और अन्य क्षेत्रों में कपास, दलहन, तिलहन और बागवानी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सिंचाई, बीज, खाद, तकनीक और बाजार सुविधा को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष का मूल उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, जोखिम कम करना और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर प्रभावी रूप से हो और इसका सीधा लाभ प्रदेश के हर किसान तक पहुंचे।