नई दिल्ली : देश में जारी कोरोना काल के दौरान ना जानें कितने लोग बेघर हो गये, कितने लोग बेरोजगार, कंगाली ने जैसे मुंह ही फाड़ लिया हो और इस कंगाली की चक्रव्यूह ने ना जानें कितने लोगों की जान लें ली। हालांकि इन सभी घटनाओं के बीच भी लोग अपने आपको धनवान बनाने के लिए तरह-तरह की कोशिश कर रहें है, कोई इसे लेकर यज्ञ कर रहा हैं तो कोई इसे लेकर तरह-तरह के टोटके अपना रहा है। वहीं अगर हम आचार्य चाणक्य की बात करें तो उन्होंने धनवान होने के लिए पांच रास्ते बताये हैं, जिसे अगर आप अपनाते हैं तो आप बहुत जल्द धनवान हो सकते हैं…
जरूरी नहीं ज्योतिषीय उपाय
जीवन में सुख समृद्धि के लिए जरूरी नहीं की आप ज्योतिषीय उपाय ही करें… इसके लिए आप आचार्य चाणक्य की नीतियों का भी अनुसरण कर सकते हैं। उन्होंने एक श्लोक के जरिए बताया है कि ऐसा क्या करें जिससे आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होगी….
चाणक्य नीति ग्रंथ के तीसरे अध्याय में श्लोक का जिक्र
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्य यत्र सुसंचितम्।
दंपतो: कलहो नास्ति तत्र श्री: स्वयमागता।।
आचार्य चाणक्य के नीति ग्रंथ के तीसरे अध्याय का 21 वें श्लोक में बताया गया है कि जहां मूर्खों को नहीं पूजा जाता। ज्ञानियों का सम्मान होता है और उनकी बातों को अमल में लाया जाता है। उनके पास धन-धान्य की कभी भी कमी नहीं होती।
बरसेगा धन ही धन
चाणक्य कहते हैं कि जहां पर अन्न का एक भी दाना बर्बाद होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता। इसलिये आप अन्न का अपमान ना करें।
रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी !
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जहां पर पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह की कटुता होती है, लड़ाई-झगड़े होते है। उनके पास कभी भी मां लक्ष्मी नहीं जाती। इसलिए आप अपने संबंध में प्रेम का संचार करें, कटुता से बचें। ऐसा करने से आपके पास धन–धान्य और सुख-समृद्धि का भंडार होता है।
धन का सहीं उपयोग करें
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने संचित धन का गलत इस्तेमाल करते हैं या फिर गलत कार्यों में धन खर्च किया जाता है। ऐसे लोगों के पास धन-धान्य कभी भी नहीं रहता। इसलिए आचार्य कहते हैं कि यदि सुख और समृद्धि का वास चाहिए तो धन-धान्य का संचयन और उसका उपयोग सहीं कार्यों में करें।