उज्जैनः क्या आप जानते हैं कि साल में एक ऐसा दिन आता है जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं? और इस खास खगोलीय घटना का उज्जैन से भी गहरा संबंध है। आइए जानते हैं, क्यों कहा जाता है उज्जैन को भारत का ग्रीनविच।
मध्यप्रदेश का उज्जैन सिर्फ धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान और समय गणना का एक ऐतिहासिक केंद्र भी रहा है। प्राचीन समय में इसे पृथ्वी और आकाश के बीच संतुलन बिंदु माना जाता था, यही कारण है कि इसे “भारत का ग्रीनविच” कहा जाता है।
21 मार्च के आसपास एक विशेष खगोलीय घटना होती है, जिसे विषुव (Equinox) कहा जाता है। इस दिन सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि पृथ्वी पर दिन और रात लगभग बराबर हो जाते हैं। इसके बाद सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती है।
उज्जैन की प्रसिद्ध जीवाजी वेधशाला इस खगोलीय अध्ययन का प्रमुख केंद्र रही है, जहां सदियों पहले शंकु यंत्र और नाड़ी वलय यंत्र जैसे उपकरणों से समय और सूर्य की स्थिति का सटीक आकलन किया जाता था। यह वेधशाला वर्ष 1733 में महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित की गई थी और आज भी यह खगोल विज्ञान के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। खास बात यह है कि यहां इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से भी देखा जा सकता है।