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असम में जल्द नियमित स्कूलों में बदले जाएंगे 614 मदरसे, CM हिमंत बिस्वा सरमा ने दिया आदेश

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: असम में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर सरकार बनाने में कामयाब हुई है। असम के लोगो ने एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताया है। नई सरकार के गठन में पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे हिमंत बिस्व सरमा को राज्य के मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठाया गया। मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करते ही बिस्व सरमा एक्शन में आ गये हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री बिस्व सरमा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भंग किए गए मदरसों को सामान्य विद्यालय में बदलने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

एक रिपोर्ट की मानें तो, उन्होंने यह निर्देश शिक्षा मंत्री रानुज पेगु और वित्त मंत्री अजंता नियोग की मौजूदगी में शिक्षा विभाग के कामकाज की व्यापक समीक्षा वाली बैठक में दिया।

आपको बता दें कि पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य सरकार द्वारा संचालित मदरसों को सामान्य विद्यालयों में बदलने का फैसला किया था। असम में 614 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें से 400 हाई मदरसे और 112 जूनियर मदरसे जबकि 102 सीनियर मदरसे हैं। इसके अलावा सरकार ने संस्कृत विद्यालयों को भी सामान्य विद्यालयों में बदलने का फैसला किया था।

राज्य सरकार हर साल मदरसों पर लगभग तीन से चार करोड़ रुपए और संस्कृति केंद्रों पर एक करोड़ रुपए खर्च होता है। इस फैसले के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि सरकार द्वारा संचालित या फंड से चलने वाले मदरसों को अगले 5 महीने के अंदर नियमित स्कूल बनाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि सरकार का काम धार्मिक शिक्षा प्रदान करना नहीं है। हम धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फंड खर्च नहीं कर सकते।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया कि, मदरसे बोर्ड को भी भंग किया जाएगा। जबकि इसके अकेडमिक पार्ट को बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन में ट्रांसफर किया जाएगा। उन्होंने आगे लिखा, मदरसों को मैनस्ट्रीम में लाने के लिए हम मदरसा एजुकेशन डायरेक्टरेट को खत्म करके इसे सेकेंडरी एजुकेशन का हिस्सा बना रहे हैं।

सरकार इन मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के स्थान पर 10वीं और 12वीं के नए स्कूल खोलने जा रही है। साथ ही इनके नाम से मदरसे शब्द भी हटा दिया जाएगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि निजी तौर पर चलने वाले मदरसे चलते रहेंगे। इसके अलावा निजी संस्कृति स्कूलों से भी कोई आपत्ति नहीं है।

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