भोपालः राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर सभी हिन्दी प्रेमियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस मौके पर उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश शंकर विद्यार्थी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पण कर किया। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री पटेल का अंगवस्त्र और ग्रंथ भेंट कर अभिनंदन किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि पत्रकारिता समाज, देश और दुनिया की गतिविधियों से आमजन को प्रतिदिन परिचित कराती है। समस्याओं को उजागर कर उनका समाधान प्रस्तुत करती है। नए परिवर्तनों और भविष्य के दिशा-दर्शन पर चर्चा और चिन्तन को प्रोत्साहित करती है।

राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल द्वारा हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने माधव राव सप्रे सम्मान से लोकमत समाचार पत्र के वरिष्ठ संपादक विकास मिश्र को, महेश गुप्ता सृजन सम्मान से अरूण नेथानी को और अशोक मानोरिया पुरस्कार से डॉ. बृजेश शर्मा को सम्मानित किया।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आयोजन का प्रसंग अतीत पर गर्व के साथ पत्रकारिता के भविष्य के लिए अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का अवसर है। यह केवल एक भाषा या माध्यम की यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की चेतना, संघर्ष, संस्कृति और विकास की जीवंत और प्रेरक गाथा के स्मरण के द्वारा भविष्य के पथ के आलोकन का प्रसंग है। उन्होंने कहा कि भारत के नव-जागरण और समाज सुधार की अलख जगाने, स्वाधीनता आन्दोलन को जन-मानस से जोड़ने, स्वदेशी, स्वावलंबन और संस्कारवान राष्ट्र निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने भारतीयता की समृद्ध परंपरा के आधार पर हिन्दी पत्रकारिता को जनहित और राष्ट्रहित की दिशा में और अधिक मजबूत बनाने के लिए संकल्पित होने का आह्वान भी किया। राज्यपाल श्री पटेल ने आधुनिक हिन्दी भाषा और पत्रकारिता को शून्य से शिखर तक पहुँचाने वाले सभी महान कवियों, लेखकों, संपादकों और विद्वानों का पुण्य स्मरण किया।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पत्रकारिता की असली पहचान, उसकी सच्चाई खोजने की क्षमता में ही है। भले ही सच की राह कठिन हो, पर भरोसा सत्य से ही मिलता है। डिजिटल युग ने फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएँ और ब्रेकिंग न्यूज की अंधी दौड़ में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तटस्थता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की अनेक चुनौतियां खड़ी की है। साथ ही रोजगार, कौशल और नवाचारों की अपार संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि ग्रॉफिक्स, वीडियो, पॉडकास्ट, वेब साइट, मोबाइल ऐप आदि डिजिटल माध्यमों के जरिए हिन्दी पत्रकारिता के रचनात्मक पहलुओं से भावी पीढ़ी को जोड़ा जाए।