लखनऊ : उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के एक होटल में कानपुर कारोबारी की मौत के मामले में सीएम योगी ने बड़ा निर्देश दिया है। जिससे अपराध में संलिप्त पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दें कि गोरखपुर पुलिस पर आरोप है कि उनकी पिटाई से 36 साल के मनीष कुमार गुप्ता की मौत हो गई थी। इसे लेकर विपक्षी पार्टियां लगातार राज्य सरकार पर हमलावर रूख अख्तियार किये हुए था।
सीएम योगी ने दिया ये निर्देश
वहीं योगी सरकार ने विपक्षी पार्टियों की बोलती बंद करते हुए सख्त निर्देश दिया है। योगी सरकार ने कहा है कि यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और डीजी इंटेल दो कमेटी बनाकर पूरे प्रदेश में पुलिसवालों के चरित्र का रिव्यू करें। साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों को जबरन रिटायर किया जाए और उन्हें नौकरी से भी बर्खास्त किया जाए।
गंभीर अपराधों में शामिल पुलिसवाले होंगे बर्खास्त
सीएम योगी ने कहा कि, ‘’हाल के दिनों में कतिपय पुलिस अधिकारियों/कार्मिकों के अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने की शिकायतें मिली हैं। यह कतई स्वीकार्य नहीं है। पुलिस विभाग में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। प्रमाण के साथ ऐसे लोगों को चिन्हित कर सूची उपलब्ध कराएं। सभी के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही होगी। अति गंभीर अपराधों में लिप्त पुलिस अधिकारियों/कार्मिकों की बर्खास्तगी की जाए।’’
मायावती ने किया योगी सरकार पर हमला
वहीं, गोरखपुर मामले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। मायावती ने ट्वीट कर कहा है कि, ”यूपी सीएम के गृह जनपद गोरखपुर की पुलिस द्वारा तीन व्यापारियों के साथ होटल में बर्बरता व उसमें से एक की मौत के प्रथम दृष्टया दोषी पुलिसवालों को बचाने के लिए मामले को दबाने का प्रयास घोर अनुचित हैं। घटना की गंभीरता और परिवार की व्यथा को देखते हुए मामले की सीबीआई जांच जरूरी है।’’
2. आरोपी पुलिसवालों के विरूद्ध पहले हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं करना किन्तु फिर जन आक्रोश के कारण मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं करना सरकार की नीति व नीयत दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सरकार पीड़िता को न्याय, उचित आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी दे, बीएसपी की माँग।
— Mayawati (@Mayawati) September 30, 2021
मायावती ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि, ‘’आरोपी पुलिसवालों के विरूद्ध पहले हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं करना किन्तु फिर जन आक्रोश के कारण मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं करना सरकार की नीति और नीयत दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सरकार पीड़िता को न्याय, उचित आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दे।’’