Home अयोध्या कौन है लावारिस लाशों के ‘मसीहा’ मोम्मद शरीफ, जानिये उनकी कहानी

कौन है लावारिस लाशों के ‘मसीहा’ मोम्मद शरीफ, जानिये उनकी कहानी

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रिपोर्ट: नंदनी तोदी
अयोध्या: पद्म अवार्ड उन लोगों को दिया जाता है, जो अपने देश और और देश के लोगों के लिए एक मिशाल बनकर उभरते है। ऐसी ही बीते दिनों एक मामला काफी सुर्खिया बटोर रहा है, वो है लावारिस लाशों का ‘मसीहा’।

दरअसल, 83 साल के मोहम्मद शरीफ को एक साल पहले पद्म अवार्ड देने की बात हुई थी, लेकिन उन्हें अभी तक वो सम्मान नहीं दिया गया है। मोहम्मद शरीफ बीते कई दिनों से बीमार है, लेकिन उनकले परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं हैउ। बता दें, मोहम्मद शरीफ साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे, जो अब बंद पड़ी है। वो किराए के मकान में रह रहे हैं।

आखिर कैसे बने लावारिस लाशों के मसीहा:

दरअसल, शरीफ के बेटे की कुछ वक्त पहले हत्या कर दी गई थी। उनको रेल की पटरियों के किनारे फेंक दिया गया था। जिसके बाद पुलिस जांच में शरीफ के बेटे की पहचान हुई। उस दिन के बाद से मोहम्मद शरीफ ने तय कर लिया था कि कोई भी लावारिस लाश हो उसका अंतिम संस्कार वो करेंगे।

आपको बता दें, उन्होंने अब तक 25 हजार से ज्यादा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया हैं।

मोहम्मद शरीफ के इस कदम पर उन्हें एक साल पहले अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने का एलान किया गया था। मोहम्मद ने ये इच्छा खुद प्रधानमंत्री मोदी से जताई थी कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित करें। लेकिन, अभी तक उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हुई।

आपको बता दें, करीब 28 साल पहले सुल्तानपुर की एक ट्रेन में शरीफ की बेटे की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद मोहम्मद शरीफ ने बेटे की हत्या का कारण बताया कि, वो किसी मजलूम की इज्जत-आबरू और सम्मान को बचाना चाहता था।

यूँ तो हर कोई इस देश के लिए तत्पर है, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपनी कहानी से प्रेरित होकर देश के लिए कुछ करने को मर मिटते है। जहा इन लोगों को पद्म पुरूस्कार से नवाज़ा जाए, वहीं दूसरी ओर इसके पास इलाज के पैसे भी नहीं है। क्या सरकार का इनके प्रति कोई कर्तव्य नहीं है।

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