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आजम खान का राजनीतिक सफर

By: RNI Hindi Desk 
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आजम खान का राजनीतिक सफर

देश की आजादी के एक साल बाद 14 अगस्त 1948 को आजम खान रामपुर में पैदा हुए। मोहल्ला घायर मीर बाज खान में जन्मे आजम खान ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई रामपुर के डिग्री कॉलेस से किया इसके बाद वो अलीगड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी चले गए। जहां, उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और 1974 में बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की।

जब 1976 में पहली बार राजनीति में आजम खान ने रखा था कदम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम मुकाम तक पहुंचे आजम खान पूरे देश में अपने अलग अंदाज-ए-बयां के लिए मशहूर हैं, हालांकि कई बार वो अपने बयानों को लेकर विवाद में छाए रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1976 का समय था जब आजम खान ने जनता पार्टी में शामिल होकर जिला स्तर की राजनीति शुरू की।

1980 में पहली बार जीत हासिल हुई

वर्ष 1980 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई। उसके बाद आजम खान के राजनीति का सफर शुरू हो गया। अबतक आजम खान 9 बार विधायक बन चुके हैं और पांच बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। रामपुर के किंग कहे जाने वाले आजम खान 1980 में रामपुर सीट से पहला चुनाव जनता पार्टी (सेकुलर) के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की।

1993 में सपा में शामिल हुए थे आजम खान

इसके बाद 1985 में वह लोकदल के टिकट पर जीतकर आए। 1989 में जनता दल के टिकट पर जीते और 1991 में जनता पार्टी से चुनकर आए। साल 1993 का समय था और इसी के ठीक एक साल पहले अक्टूबर 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) की नींव रखी। और सपा ने 1993 में यूपी विधानसभा चुनाव में आजम खान को टिकट दिया, इस चुनाव में भी आजम खान ने बाजी मार ली।

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यूपी में सबसे बड़े मुस्लिम नेता हैं आजम खान

उत्तर प्रदेश में आजम खान का वो चेहरा है जो मुस्लिम चेहरे के सबसे बड़े नेता के रूप में पहचाना जाता है। मुस्लिम समाज में आजम खान का अपना अलग वर्चस्व है। वो हमेशा प्रदेश व देश के मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। और यही वजह है कि समाजवादी पार्टी की झोली में मुलमानों का वोट आजम खान के बदौलत आता रहा।

जब भाजपा भी नाकामयाब रही आजम खान को हराने में

आजम खान पहली बार कैबिनेट मंत्री वर्ष 1989 में बने, जिसके बाद उन्हें श्रम-रोजगार के साथ साथ मुस्लिम वक्फ और हज विभाग की जिम्मेदारी मिली। यूपी के कद्दावर नेताओं में आजम खान का नाम सुमार है। यहां तक की यह भी माना जाता है कि मुलायम सिंह यादव के सबसे पुराने साथियों में से एक आजम खान भी हैं। आजम खान की राजनीति और रामपुर में उनका वर्चस्व उस वक्त देखने को मिला था जब साल 2017 में विधानसभा की चुनाव में भाजपा ने 324 सीटों पर कब्जा जमाया था, लेकिन इस स्थिति में भी आजम खान को रामपुर सीट से कोई हटा नहीं सका।

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