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पीएम मोदी तक पहुंची संभल के बेटी के मन की बात, 19 पेज का सुसाइड नोट लिखकर दी थी जान

By: RNI Hindi Desk 
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पीएम मोदी तक पहुंची संभल के बेटी के मन की बात, 19 पेज का सुसाइड नोट लिखकर दी थी जान

यूपी के संभल के बबराला की रहने वाली पन्द्रह वर्षीय छात्रा द्वारा आत्महत्या से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम लिखी गई उम्मीदों भरी 19 पन्ने की चिटठी अब प्रधानमंत्री तक पहुंच गई है। हिन्दुस्तान द्वारा मामला उजागर किये जाने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने आंचल के मन की चिटठी प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का काम किया है।

बबराला की रहने वाली छात्रा ने 14 अगस्त की शाम को आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले छात्रा ने घर परिवार की बजाये देश के हालात को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री के नाम 19 पेज की उम्मीदों भरी चिटठी लिखी। इस चिटठी में छात्रा ने देश में बढ़ते प्रदूषण व जनसंख्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से समाधान की उम्मीद जाहिर की थी। कहा था- मैं जानती हूं इन समस्याओं के समाधान में लंबा समय लेगा, पर अगर प्रधानमंत्री जी आपने नहीं किया तो शायद ही कोई करे। हिन्दुस्तान ने 18 अगस्त के अंक में प्रमुखता से -मोदी को उम्मीदों भरी चिट्ठी लिखकर दुनिया छोड़ गई शीर्षक से आंचल की मोदी को चिटठी की बात उजागर की थी। इसके बाद ही राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने मामले का संज्ञान लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अखबार की कटिंग के साथ ही उसके द्वारा लिखी गई चिट्ठी की कापी भी मेल व डाक से प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दी।

मन मस्तिष्क में थी पीएम मोदी से मिलने की इच्छा

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने आंचल की चिटठी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गये पत्र में देश की समस्याओं को लेकर आंचल की सोच को सराहा है। डा. विशेष गुप्ता ने कहा कि छात्रा ने देश में भ्रष्टाचार, अपराध, वन संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक, आध्यात्मिक, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, पशुओं की हत्या, समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूकता, जनसंख्या नियंत्रण प्लास्टिक उपयोग पर प्रतिबंध, धार्मिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण, चिकित्सा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार व इलाज में बरती जा रही लापरवाही के साथ ही बाल भिक्षावृति आदि को लेकर अपनी चिटठी में जिस तरह चिंता जाहिर की है उससे लगता है कि उसने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने की आशा व इच्छा अपने मन और मस्तिष्क में सजाई हुई थी।

मुद्दों पर संवाद न होना भी हो सकता है आत्महत्या की वजह
बाल संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता का कहना है कि कोरोना कालखंड में उसने देश से जुड़े इन मुद्दों पर मन ही मन विचार किया। परंतु उसके तर्कों से उचित संवाद न होने के कारण यह सामाजिक मुद्दे उसके मन मस्तिष्क को परेशान करते रहे होंगे। स्कूल बंद थे, उसका पियर समूह भी केवल सोशल मीडिया पर था। प्रत्यक्ष संवाद की उसकी परंपरा भी शांत थी। इसलिए उसके मन में कौंध रहे इन मुद्दों पर संवाद नहीं हो सका । हो सकता है कि इसी द्वंद के बाद उसने आत्महत्या कर ली हो।

मन की बात में हो चर्चा
प्रधानमंत्री को भेजे गये पत्र में डा. विशेष गुप्ता ने अनुरोध किया है कि 30 अगस्त को आपके द्वारा मन की बात कार्यक्रम में देश के समक्ष संबोधन किया जाना है। उसमें इस अबोध बालिका के मनोभावों की कथित अभिव्यक्ति आपके द्वारा अभिव्यक्ति होगी तो उस बालिका की आत्मा को जाकर संतोष प्राप्त होगा।

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