एलडीए की संपत्तियों की जियो टैगिंग होगी। इससे संपत्तियों की बिक्री में होने वाला फर्जीवाड़ा रुकेगा। प्राधिकरण के बाबुओं व अधिकारियों ने जिन भवनों-भूखंडों की फाइलें दबा रखी हैं वह भी सामने आ जाएंगी। शासन के निर्देश के बाद कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने एलडीए से इस पर तत्काल काम शुरू कराने को कहा है।
प्रदेश के कई विकास प्राधिकरण संपत्तियों की जियो टैगिंग कराने जा रहे हैं। शासन के प्रमुख सचिव आमोद कुमार ने भवनों, भूखंडों, फ्लैटों तथा प्राधिकरण की अन्य संपत्तियों की जियो टैगिंग कराने के लिए 27 जुलाई को कमिश्नर व एलडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिखा है। जियो टैगिंग रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से होगी।
प्रमुख सचिव आवास ने भी इसके लिए निर्देशित किया है। जियो टैगिंग के लिए प्राधिकरण के खसरा मानचित्र का जियो रिफरेंस कर मोजैक तैयार किया जाएगा। इसके बाद मास्टर प्लान के साथ इसे सुपरइंपोज करते हुए जियो स्पेशल डाटा बेस तैयार होगा। इसके बाद प्राधिकरण की सीमा की सभी जमीनों का भू उपयोग एक क्लिक में पता किया जा सकेगा। शासन के निर्देश के बाद एलडीए ने जियो टैगिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
सामने आ जाएगा फर्जीवाड़ा
जियो टैगिंग से एलडीए के एक-एक प्लॉट मकान तथा फ्लैट का पूरा ब्यौरा सामने आ जाएगा। इससे यह भी पता चलेगा कि कौन सा प्लॉट बिका है कौन सा नहीं। किस भूखंड पर निर्माण हुआ है और किस पर नहीं। बाबू व अधिकारियों ने प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर जिन संपत्तियों को दबा रखा है वह भी बाहर आ जाएंगी।
यह भी होगा फायदा
–एलडीए की कॉलोनियों में खाली प्लाटों की स्थिति पता चलेगी
–अवैध निर्माणों के बारे में भी जानकारी मिलेगी
–शहर के किस हिस्से में कौन सी सुविधाऐं है और किस चीज की जरूरत है इसे भी एक क्लिक में पता किया जा सकेगा
–जमीन के हर खसरे का भूमि उपयोग मालूम होगा
–भविष्य में नई योजनाओं के निर्माण व विकास में भी काफी मदद मिलेगी
–संपत्तियों के अलॉटमेंट की स्थिति भी जान सकेंगे