Home उत्तर प्रदेश कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद ठीक होने लग रहा लम्‍बा वक्‍त, सामने आई ये वजह

कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद ठीक होने लग रहा लम्‍बा वक्‍त, सामने आई ये वजह

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गोरखपुर : कोरोना संक्रमित स्वास्थ विभाग के एक कर्मचारी की एक पखवारे बाद हुई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ गई। इसके दो दिन बाद कर्मचारी की तबीयत कुछ बिगड़ी। दोबारा जांच हुई रिपोर्ट तो निगेटिव रही लेकिन लक्षण कोरोना संक्रमण जैसे रहे। उसे आनन-फानन में दोबारा कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी तरह बीआरडी मेडिकल कॉलेज का लैब टेक्नीशियन करीब डेढ़ माह के अंतराल में दोबारा संक्रमित हो गया। विशेषज्ञ डेड वायरस के लंबे समय तक शरीर में बने रहने को इसकी वजह बता रहे हैं।

आमतौर पर माना जा रहा है कि एसिम्प्टोमेटिक संक्रमित में 10 से 12 दिन में वायरस निष्क्रिय हो जाता है। शासन ने इस पर गाइडलाइन भी जारी की है। शासन ने साफ किया है कि एसिम्प्टोमेटिक में 12 से 15 दिन में संक्रमण खत्म हो जाता है। उन्हें किसी जांच की जरूरत नहीं। जबकि शहर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि लोग 30 से लेकर 40 दिन तक पॉजिटिव मिले।

आरटी-पीसीआर और एंटीजन जांच में मिल रहे हैं संक्रमित
संक्रमण के कुछ मामले हैरान करने वाले हैं। सरकारी अस्पताल से जुड़े अवर अभियंता 25 दिन से संक्रमित हैं। वह एसिम्प्टोमेटिक हैं। उन्होंने आरटीपीसीआर और एंटीजन से जांच कराई। दोनों में रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। अब तक चार बार जांच करा चुके हैं। हर रिपोर्ट में पॉजिटिव की तस्दीक हुई।

डेड वायरस दे रहा संक्रमण के सबूत 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह बताते हैं कि संक्रमण ठीक होने का अर्थ शरीर से वायरस का खत्म होना नहीं है। शरीर में लंबे समय तक वायरस मौजूद रह रहा है। इसके साक्ष्य मिले हैं। लोग निगेटिव होने के बाद पॉजिटिव हो गए। आरटी-पीसीआर की जांच में अब तक नौ लोग ऐसे मिले हैं जिनमें दोबारा संक्रमण की तस्दीक हुई है। दरअसल, यह रेजिड्यूल डेड वायरस के कारण हो रहा है। यह खतरनाक तो नहीं है लेकिन इसकी मौजूदगी के कारण तकनीकी तौर पर लोग संक्रमित माने जाएंगे।

बोले एक्सपर्ट
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के कारण संक्रमित के शरीर में कोरोना वायरस निष्क्रिय हो जाता है। उसमें संक्रमण फैलाने या विकसित होने की ताकत नहीं रह जाती है। वह शरीर के अलग हिस्सों में निष्क्रिय रूप में पड़ा रहता है। इसे रेजिड्यूल डेड वायरस कहते हैं। कोरोना के दौरान मशीन उसे पहचान लेती है। कुछ मामलों में एंटीजन किट से यह वायरस डिडक्ट हुआ है।

 

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