Home उत्तर प्रदेश कोरोना और एचआईवी से संक्रमित की बीआरडी में हुई नार्मल डिलीवरी, दो रेजीडेंटों ने निभाया फर्ज

कोरोना और एचआईवी से संक्रमित की बीआरडी में हुई नार्मल डिलीवरी, दो रेजीडेंटों ने निभाया फर्ज

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गोरखपुर : कोरोना के खतरों को दरकिनार करते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की दो सीनियर रेजीडेंट मिसाल पेश कर रही हैं। गायनी की दोनों रेजिडेंट अब तक चार संक्रमित महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी करा चुकी हैं। इनमें एक गर्भवती कोरोना के साथ एचआईवी संक्रमित भी थी।

कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अलग कोरोना वार्ड की स्थापना हुई। इसी में 20 बेड का गायनी विंग संचालित होता है। इस विंग में गर्भवती की नार्मल और सिजेरियन डिलीवरी के लिए इंतजाम हैं। लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर भी है। संक्रमण बढ़ने पर गर्भवती महिलाएं भी कोरोना की चपेट में आने लगीं।  मंडल के जिलों से संक्रमित गर्भवती बीआरडी में भर्ती होने लगीं। प्रसव में संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए शुरू के 10 प्रसव सिजेरियन हुए। कोविड वार्ड में बतौर सीनियर रेजिडेंट डॉ. अन्वेषिका और डॉ.  वृतिका की ड्यूटी लगी। डॉ.अन्वेषिका ने पहले साहस दिखाया। महाराजगंज से आई संक्रमित गर्भवती की नॉर्मल डिलीवरी कराई।

इसके कुछ दिन बाद कुशीनगर से संक्रमित गर्भवती बीआरडी पहुंची। महिला नौ महीने की गर्भवती थी। संक्रमण की तस्दीक के बाद उसे प्रसव के लिए कोविड वार्ड के लेबर रूम में भेजा गया। यहां पर जांच में उसे एचआईवी की भी पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ में हड़कंप मच गया। ऐसे में डॉ. वृतिका ने आगे बढ़ कर गर्भवती की नार्मल डिलीवरी कराने का फैसला किया। उन्होंने डॉ.अन्वेषिका के साथ मिलकर प्रसूता की नार्मल डिलीवरी कराई दी। दोनों अब तक चार प्रसूताओं की नार्मल डिलीवरी करा चुकी हैं।

इसलिए खतरनाक है नॉर्मल डिलीवरी 
कोरोना संक्रमित के इलाज में डॉक्टरों को भी संक्रमित होने का खतरा होता है। इस वजह से डॉक्टर मरीज के संपर्क में ज्यादा लंबा समय तक रहना पसंद नहीं करते। यह खतरनाक हो सकता है। सिजेरियन में डॉक्टर मरीज के 20 से 25 मिनट ही रहता है। नॉर्मल डिलीवरी में डॉक्टर को चार से पांच घंटे का समय लगता है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में ज्यादातर प्रसव सिजेरियन हो रहे हैं।

बीआरडी में तीन चौथाई प्रसव हुए सिजेरियन 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में 24 प्रसव हो चुके हैं। इनमें से 17 सिजेरियन हैं। अब तक सिर्फ सात प्रसव नॉर्मल हुए हैं। शुरुआत में 10 प्रसव सिजेरियन हुए।

दोनों रेजिडेंट अपने काम को लेकर बेहद संजीदा है। वह साहसी भी हैं। नॉर्मल डिलीवरी कराने के खतरे जानने के बावजूद उन्होंने यह रिस्क लिया। उनकी मेहनत और जज्बा काबिले तारीफ है।

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