Home आगरा आगरा का छत्रपति शिवाजी संग्रहालय ब्रज क्षेत्र के इतिहास और कलाकृतियों को भी समेटेगा

आगरा का छत्रपति शिवाजी संग्रहालय ब्रज क्षेत्र के इतिहास और कलाकृतियों को भी समेटेगा

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आगरा : मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी के नाम पर बनने वाला आगरा का संग्रहालय (मुगल संग्रहालय) अब उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र की कलाकृतियों और इतिहास को समेटे होगा। अपर मुख्य सचिव गृह और सूचना अवनीश अवस्थी ने बुधवार को बताया कि ब्रज क्षेत्र आगरा मंडल के अन्तर्गत आता है। ब्रज क्षेत्र और आगरा मंडल को संग्रहालय में शामिल करते हुए जल्दी से काम शुरू करेंगे। ब्रज को बृज या बृज भूमि भी कहते हैं और यह मथुरा और वृंदावन के आसपास स्थित है। यह भगवान कृष्ण की नगरी मानी जाती है। यह इलाका मथुरा से आरंभ होकर जलेसर, आगरा, हाथरस और अलीगढ. से एटा, मैनपुरी और फर्रुखाबाद जिलों तक फैला है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर को आगरा में मुगलों की विशेष उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले ‘मुगल संग्रहालय’ का नाम बदल कर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने का आदेश दिया था। लखनऊ में आगरा मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री यह आदेश दिए थे। एक सरकारी बयान के मुताबिक उन्होंने जोर देते हुए कहा था, ‘मुगल हमारे नायक कैसे हो सकते हैं।’ छत्रपति शिवाजी का नाम राष्ट्रवाद और आत्मसम्मान की भावना का संचार करेगा।

इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बुधवार को कहा कि इस परियोजना की संकल्पना वर्ष 2015 में तैयार की गई थी और इसे 2017-18 तक पूरा होना था। उन्होंने कहा, ‘आगरा में एक व्याख्या केंद्र (इन्टरप्रेटेशन सेंटर) बन चुका है, जिसमें ताजमहल और अन्य ऐतिहासिक इमारतों के बारे में वीडियो, किताबे और अन्य सामग्री रखी है। विदेशी नागरिकों के लिए उनकी भाषा में स्थानीय कला, संस्कृति,शिल्प और देश की विरासत के बारे में सारी जानकारी यहां उपलब्ध हैं। यहां पर आगरा के अलावा ब्रज क्षेत्र की कला और शिल्प के बारे में भी कई स्टॉल हैं।’ यह पूछे जाने पर कि क्या शुरुआती योजना में इसमें ब्रज शामिल था तो उन्होंने कहा, ‘मेरी समझ से यह शामिल था।’

संग्रहालय बनाए जाने के उददेश्य के बारे में आलोक रंजन ने बताया, ‘इसका उदेश्य यह था कि आगरा पर्यटन के क्षेत्र में उप्र का सबसे बड़ा राजस्व का केंद्र है, लेकिन हमारे सामने समस्या यह आ रही थी कि आगरा को उतना राजस्व नहीं मिल रहा था क्योंकि दिल्ली के लोग यहां का राजस्व ले जाते हैं। दिल्ली से पर्यटक बुकिंग कराकर आते हैं, आगरा में घूमते हैं और वापस लौट जाते हैं। पर्यटक आते हैं, ताजमहल देखते हैं और वापस दिल्ली लौट जाते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि होटल उदयोग, रेस्टोरेंट, दुकानदारों और शिल्पकारों को कोई लाभ नही पहुंचता है।’

रंजन ने बताया, ‘हमें राजस्व तभी मिलेगा जब लोग आगरा में रात गुजारेंगे और उनके लिए रात को देखने के लिए कुछ होना चाहिए। कोई भी पर्यटक कब तक ताजमहल को ही देखता रहेगा? तब ताजमहल के इर्द-गिर्द का सारा इलाका विकसित करने का विचार आया और हमने वहां व्याख्या केंद्र बनाया जिसमें आगरा के बारे में वीडियो, किताबें और अन्य सामग्री रखवाई। इसके एक हिस्से में मुगल संग्रहालय भी बनवाया गया। इसके पीछे विचार यह था यहां मुगल काल का इतिहास, कला, संस्कृति, शिल्प और साहित्य संजो कर रखी जाएं और यह स्थान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनें।’

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