Home उत्तर प्रदेश गरीबी में शव नहीं ले आ पाए, अब डेथ सर्टिफिकेट को लगा रहे चक्कर : गोरखपुर

गरीबी में शव नहीं ले आ पाए, अब डेथ सर्टिफिकेट को लगा रहे चक्कर : गोरखपुर

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गोरखपुर : कोरोना लॉकडाउन के बीच परदेश में हुई मौत के मामले में जो परिवार गरीबी के चलते अपनों बेटों या पति का शव नहीं ले आ पाए, उन्हें अब मौत के सबूतों के अभाव में डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। मौत का कोई दस्तावेजी प्रमाण न होने से उनका डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है।

चौरीचौरा के डुमरी खुर्द गांव के सुनील की दिल्ली के पंजाबी बाग में 15 अप्रैल को मौत हो गई थी। पुलिस की मदद से वहीं पर अंतिम संस्कार किया गया। पांच महीने बाद भी उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट न मिलने के कारण सुनील का डेथ सर्टिफिकेट नहीं बना पा रहा है। सुनील की पत्नी पूनम की विधवा पेंशन की फाइल ही नहीं चल पा रही है। हरपुरबुदहट के रामनगर सुरसा निवासी उमेश की भी यही कहानी है। उमेश की मौत मुम्बई में हुई थी। परिवारीजन शव नहीं ले आ पाए थे। मौत का कोई प्रमाणपत्र न होने से उमेश की मौत 30 अप्रैल को मुंबई में हुई थी। पिता की रजामंदी पर वहीं पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक मई को पुतला बनाकर यहां आमी नदी के किनारे बेटे का अन्तिम संस्कार कर दिया। मुम्बई पुलिस ने शव का क्या किया पता नहीं चला। वहां से अब तक कोई प्रमाणपत्र या पीएम रिपोर्ट कुछ भी नहीं मिला। प्रधान राजकुमार ने बताया उमेश की मौत कोई प्रमाणपत्र न मिलने से उसका डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है। गरीब परिवार मुम्बई जा नहीं पा रहा है।

डीएम ने घर जाकर की थी घोषणा

सुनील की मौत और परिवार की गरीबी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे संज्ञान में लिया था। गांव पहुंचे डीएम ने सुनील की विधवा पूनम तथा पिता राधेश्याम से बात की थी। सुनील चार बेटियों तथा एक बेटे का पिता था। सबसे बड़ी बेटी दस साल की है जबकि सबसे छोटा बेटा दो साल का है। डीएम ने दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक दिया था और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास, सुनील की विधवा को रसोइए की नौकरी, बच्चों की नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था, पट्टा की जमीन, सहित अन्य सुविधाएं देने की घोषणा की थी।

नहीं बना है परिवार का अंत्योदय कार्ड

पूनम ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास का निर्माण तो शुरू हो गया है लेकिन अन्य किसी तरह की सुविधाएं नहीं मिली। डीएम साहब ने रसोइए की नौकरी देने के लिए कहा था वह नहीं मिली, बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबें तक नहीं मिल पाई। अंत्योदय कार्ड तक नहीं बना पाया है। पिता राधेश्याम ने बताया कि अन्य सुविधाएं तो छोड़िए बेटे का डेथ सर्टिफिकेट तक नहीं बन पा रहा है।

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