उत्तर प्रदेश : ब्राह्मण नेता का कांग्रेस पार्टी छोड़ना, क्या रही वजह ,पढ़े
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक बड़े ब्राह्मण नेता ने पार्टी छोड़ दी है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने पार्टी महासचिव और कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया है और कहा है कि गांधी परिवार अपना चेहरा बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं का अपमान कर रहा है और उन्हें पार्टी छोड़ने को मजबूर किया जा रहा है।
पंडित विनोद मिश्रा का यहां तक आरोप है कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश इकाई को वामपंथी नेताओं के हवाले कर दिया गया है। उधर असम में कांग्रेस ने अपनी एक विधायक को बीजेपी में जाने के शक में पहले ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ब्राह्मण महासभा के संयजोक पंडित विनोद मिश्रा ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। विनोद मिश्रा पहले प्रदेश कांग्रेस के महासचिव भी रह चुके हैं और राज बब्बर के कार्यकाल में वह लखनऊ जिले के इंचार्ज भी रह चुके हैं। अपनी ओर से जारी बयान में मिश्रा ने अपने इस्तीफे के लिए पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांधी परिवार सीबीआई और ईडी से अपना चेहरा बचाने के लिए पार्टी का इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए वरिष्ठ नेताओं को अपमानित होना पड़ रहा है और उन्हें मजबूरन पार्टी छोड़नी पड़ रही है।

मिश्रा ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस को पहले से ही वामपंथी नेताओं के हाथों में सौंप दिया गया है। अब वही लोग सबकुछ संभाल रहे हैं और सौ साल से भी ज्यादा पुरानी पार्टी के लिए, जो कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
उनके मुताबिक पार्टी अपनी नीतियों से भटक गई है और सिर्फ वाड्रा को बचाने में लगी हुई है। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू को भेज दिया है। उन्होंने इस बात इनकार किया है कि वह किसी दूसरी पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अब वह अपना पूरा वक्त ब्राह्मण महासभा को मजबूत करने में लगाएंगे। गौरतलब है कि यूपी में कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने की कवायद कर रही है, ऐसे में एक ब्राह्मण नेता का इस तरह से पार्टी छोड़ना सही संकेत नहीं है।
उधर पार्टी की कार्य प्रणाली से असंतुष्ट चल रहे ग्रुप-23 के नेताओं के साथ समझौता-वार्ता के बाद पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी एक बार फिर से पार्टी गतिविधियों को लेकर सक्रिय हो गई हैं।
उन्होंने असम में पार्टी की एक विधायक अजनंता नियोग को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों में निष्कासित कर दिया है। असम के पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री के बारे में पार्टी को यह शक था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की यात्रा के दौरान वह सत्ताधारी भाजपा का कमल थाम सकती हैं।
वैसे अगर वाकई आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यदि अजनंता नियोग बीजेपी में शामिल होती हैं तो असम में यह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और तरुण गोगोई सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने भी बीजेपी ज्वाइन किया था और अपने साथ और कई नेताओं को ले गए थे। कांग्रेस आजतक उस झटके से उबर नहीं पाई है।