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UP: घंटों इंतजार के बाद भी बेटे के शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए नहीं मिला शव वाहन, तो बाइक पर ही ले गया पिता…

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : कोरोना के कम होती रफ्तार के बीच एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सीतापुर में जिला अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिसने फिर लोगों को सोचने को मजबूर कर दिया है, की जब राज्य में कोरोना केसों की संख्या अधिक थी, तो उस समय शव वाहन नहीं मिल पा रहे थे, लेकिन अब जब कोरोना की रफ्तार कम हुई है तो फिर भी अस्पताल प्रशासन शव वाहन उपलब्ध कराने में नकाम दिख रहा है। और अपनी इस नाकामी का ठिकरा भी अस्पताल पीड़ित परिवार को दे रहा है।

जानकारी के मुताबिक, तालगांव क्षेत्र के निवासी छेदी का 9 साल का बेटा मंगलवार को कस्बे में सड़क हादसे का शिकार हो गया था। परिजनों ने उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था पर बुधवार सुबह मासूम बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में रखवा दिया। पुलिस ने पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार किया, जिसके बाद परिजन शव को पोस्टमॉर्टम हाउस तक ले जाने के लिए शव वाहन की तलाश करने लगे।

इस दौरान बच्चे के पिता ने शव  वाहन के ड्राइवरों को फोन किया और उन्होंने जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने की बता कही। लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कोई नहीं आया। इसके बाद पिता को अपने बेटे के शव को बाइक पर पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाना सही समझा। वहीं इस मामले पर जिला अस्पताल प्रशासन का कहना हैं कि पीड़ित परिवार को थोड़ा सब्र करना चाहिए था क्योंकि शव वाहन लाने-ले जाने में समय लगता है और लगातार वाहन इसी काम में लगे हैं।

इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस ए. के.अग्रवाल ने कहा कि पंचायतनामा के बाद शव को ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की होती है। अगर फिर भी ऐसी कोई बात थी वह मुझे सूचित करते तो अस्पताल प्रशासन उसे पोस्टमॉर्टम हाउस भिजवाने का प्रयास करता।

आपको बता दें कि यूपी का यह कोई मामला नहीं है, इससे पहले भी जरूरत के समय कई परिजनों को शव वाहन और एंबुलेंस की समस्या हुई थी। कोरोना काल में ऐसे तमाम मामले सामने हैं। फिलहाल कोरोना की रफ्तार में कुछ ब्रेक लगा है, इसके बावजूद प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूट पाई है।

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