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MP News: एक कमरे में तीन कक्षाएं, बरामदे में नन्हे छात्र… प्यास और गंदगी से जूझते बच्चे

स्कूल में जगह की भारी कमी के चलते कक्षा तीसरी, चौथी और पांचवी के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में पढ़ाया जा रहा है।

By: Abhinav Tiwari 
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MP News: एक कमरे में तीन कक्षाएं, बरामदे में नन्हे छात्र… प्यास और गंदगी से जूझते बच्चे

बुरहानपुर (नेपानगर)। ग्रामीण क्षेत्र बोरसल की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था बदहाली की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है। बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र में स्थित बोरसल गांव की प्राथमिक शाला पिछले छह माह से जर्जर भवन के कारण माध्यमिक शाला परिसर में संचालित हो रही है। सीमित संसाधनों और अव्यवस्थित ढांचे के कारण यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर कक्षा तीसरी से पांचवी तक के छात्र

स्कूल में जगह की भारी कमी के चलते कक्षा तीसरी, चौथी और पांचवी के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में पढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है, बल्कि बच्चों की एकाग्रता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। शिक्षक भी सीमित स्थान में एक साथ कई कक्षाओं को संभालने को मजबूर हैं।

बरामदे में बैठकर पढ़ रहे पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे

हालात इतने खराब हैं कि कक्षा पहली और दूसरी के नन्हे छात्र खुले बरामदे में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। धूप, धूल और मौसम की मार के बीच पढ़ाई करना इन बच्चों के लिए रोज की मजबूरी बन चुका है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी खतरा बना हुआ है।

मध्यान्ह भोजन ऑफिस रूम में, अलग रसोई कक्ष नहीं

विद्यालय में मध्यान्ह भोजन के लिए अलग से रसोई कक्ष उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में ऑफिस रूम में ही भोजन तैयार किया जा रहा है। इससे स्वच्छता और प्रशासनिक कार्य दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं, वहीं बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पानी और शौचालय की स्थिति बेहद खराब

स्कूल में पेयजल व्यवस्था भी बदहाल है। विद्यालय सुबह 10 बजे खुलता है, लेकिन पानी दोपहर करीब 12 बजे आता है। इस दौरान बच्चों और शिक्षकों को पानी के बिना ही रहना पड़ता है। वहीं शौचालयों में भारी गंदगी फैली हुई है। पहले भी इस समस्या को लेकर खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है।

जिम्मेदारों की अनदेखी से बच्चों का भविष्य दांव पर

बोरसल स्कूल की यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई कर रहे बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन जल्द से जल्द इस ओर ध्यान दे और बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक शिक्षा वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

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