रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में तीन मार्च शनिवार को नक्सली और सुरक्षाबलों के बीच शनिवार तीन अप्रैल को हुए मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गये थे। इस दौरान नक्सलियों ने एक कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को अपने कब्जे में ले लिया था। शुक्रवार 8 अप्रैल को नक्सलियों ने कोबरा कमांडो राकेश्वर मन्हास को रिहा कर दिया है।
CoBRA jawan Rakeshwar Singh Manhas kidnapped by Naxals during Bijapur attack on April 3, has been released by them: Police sources pic.twitter.com/7ikLXFd8Ym
— ANI (@ANI) April 8, 2021
आपको बता दें कि नक्सलियों ने कोबरा जवान को जिस तरीके से रिहा किया, वो काफी अपमानित करने वाला था। नक्सली उन्हें रस्सियों से बांध कर लेकर आए। इसके साथ ही नक्सलियों ने उन्हें अपमानित किया और गांव में उनकी परेड कराई। रिहाई के दैरान नक्सली जिस तरह से उनसे पेश आये, देखकर तो यही लग रहा था कि हमारा यह जवान किसी दूसरे देश में है।
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नक्सलियों ने उन्हें रस्सी से बांध कर बीजापुर के आदिवासी इलाकों में लेकर आए, जो नक्सल प्रभावित इलाका है। इससे पहले ही इन नक्सलियों ने इसकी जानकारी वहां के कुछ गांवों, आदिवासी नेताओं और मीडियाकर्मियों को दी थी। जानकारी मिलने के बाद जब वहां भीड़ इकट्ठा हो गई तो ये हथियारबंद नक्सलवादी कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को वहां लेकर आए। मीडिया के सामने ही उनके हाथों में बांधी गई रस्सियां खोली गईं और फिर उन्हें रिहा किया गया।
नक्सलियों ने कोबरा जवान को रिहा क्यों किया आइये जानते हैं इसका कारण…
नकिसलियों ने कोबरा जवान राकेश को केवल इसलिए रिहा कर दिया, कि सरकार का डर, वहीं दूसरी स्ट्राइक का डर
आपको बता दें कि सबसे बड़ी वजह सरकार का डर था। मुठभेड़ में 22 जवानों की शहीदहो जाने के बाद देश में काफी गुस्सा था। यह बात नक्सलियों को पता चल गया था कि केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के 22 जवानों की जान लेने के बाद मोदी सरकार उन्हें छोड़ने वाली नहीं है। उनको ये पता था कि सरकार हर मौत का हिसाब लेगी।
Today is the happiest day of my life. I always remained hopeful of his return. I thank the government: Meenu, wife of CRPF jawan Rakeshwar Singh Manhas pic.twitter.com/wFoEQ9sZ3f
— ANI (@ANI) April 8, 2021
आपको बता दें कि हाल ही में नक्सलियों ने एक चिट्ठी जारी कर ये बताने की कोशिश की था कि नक्सली कोबरा जवान राकेश्वर का इलाज करा रहे हैं। इसके साथ ही नक्सलियों ने मध्यस्थता की पेशकश की और फिर स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से संपर्क किया था। जिसके बाद उन्होने एक इवेंट करके कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को छोड़ा है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मिन्हास से बात की। अधिकारियों की मानें तो गृह मंत्री ने टेलीफोन पर कांस्टेबल राकेश्वर सिंह मिन्हास का बातकर उनसे हालचाल जाना। कमांडो की पत्नी ने सरकार को धन्यवाद कहा है।