रिपोर्ट: सत्यम दुबे
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सभी पार्टियां दम खम के साथ लग गई है। सभी पार्टियां अब अपने वोट बैंक के समींकरण को बैठा रही है। इस बार के विधानसभा चुनवा में सभी पार्टियों की निगाह ब्राह्मण मतदाताओं पर टिक गई हैं। हाल ही में अयोध्या में बसपा के राष्ट्रीय महसचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने ब्राह्मणों को साधने के लिए एक कार्यक्रम ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ किया था। जिसके बाद से अब लग रहा है कि प्रबुद्ध सम्मेलनों का दौर भी शुरु हो गया है।
बसपा के बाद अब समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने सोमवार को बताया कि पार्टी के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ और परशुराम पीठ के वरिष्ठ सपा नेताओं ने रविवार को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। पार्टी अध्यक्ष ने अगले महीने बलिया से, बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित करने की अनुमति दी है।
उन्होने कहा कि पार्टी के पूर्व विधायक संतोष पांडे के नेतृत्व में परशुराम पीठ ने भी ऐसी बैठक आयोजित करने की इच्छा जताई और पार्टी अध्यक्ष ने इसे हरी झंडी दे दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान ब्राह्मणों और अन्य लोगों के लगातार उत्पीड़न और अत्याचारों को लेकर लोगों में नाराजगी है और उन्हें जागरूक किया जाएगा कि राज्य में सपा के नेतृत्व वाली सरकार में ही उन्हें न्याय मिलेगा।
सपा की तैयारियों के बारे में पिछले लोकसभा चुनाव में बलिया से सपा के उम्मीदवार रहे सनातन पांडेय ने एक समाचर पत्र से बताया कि सपा के बैनर तले 23 अगस्त को बलिया में प्रबुद्ध सम्मेलन होगा। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन को विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज पांडेय सम्बोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार के साथ ही अन्य जातियों के शिक्षित लोगों का जमावड़ा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जातीय सम्मेलन नही है।
वहीं बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार, 18 जुलाई को दावा किया था कि अगले वर्ष राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट नहीं देंगे। मायावती ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, ”मुझे पूरा भरोसा है कि अब ब्राह्मण समाज के लोग भाजपा के बहकावे में नहीं आएंगे और अगले विधानसभा चुनाव में उसे वोट नहीं देंगे।