रिपोर्ट:धीरज मिश्रा
देश में कोरोना के केस रोजाना बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में 1.79 लाख कोरोना के नए मरीज बढ़े हैं। ऐसे में दिल्ली समेत कई राज्यों में लॉकडाउन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालांकि इस पर दो पहलू हैं। एक पक्ष समर्थन में है तो दूसरा तबका यह नहीं चाहता क्योंकि लोगों की रोजी-रोटी का सवाल है।
कोरोना वायरस की तीसरी लहर पांच गुना तेजी से फैल रही है। देश के सात राज्यों में संक्रमण की विस्फोटक स्थिति है। ओमिक्रोन के तेजी से प्रसार के कारण मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न होती है क्या देश में लाकडाउन लगेगा।
लॉकडाउन… कोरोना फैलने से पहले देश के ज्यादातर लोगों ने शायद ही कभी इस शब्द के बारे में सुना हो। लेकिन दो साल के भीतर अंग्रेजी का यह शब्द अब हर शख्स की जुबान पर आता रहता है। पहली, दूसरी के बाद अब कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है। कोरोना केसेज बढ़ने लगे हैं, मौतें हो रही हैं तो दिल्ली, यूपी समेत कई राज्यों में चर्चा हो रही है कि क्या लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए?
दरअसल, नाइट कर्फ्यू का असर कम हो रहा है। दिल्ली में नाइट कर्फ्यू के बाद भी जब संक्रमण की रफ्तार नहीं घटी तो वीकेंड कर्फ्यू का फैसला किया गया। तमिलनाडु सरकार ने तो रविवार को एक दिन के लिए संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया था। दिल्ली में भी काफी चर्चा हो रही है क्योंकि केस अब भी नहीं घटे हैं और पॉजिटिविटी रेट बढ़ रहा है।

एक दिन पहले सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि लॉकडाउन लगेगा? हम लॉकडाउन नहीं लगाना चाहते। लॉकडाउन नहीं लगेगा अगर आप मास्क पहनोगे। जरूरत न पड़े तो घर से बाहर न ही निकलो अभी थोड़े दिन कोई जरूरी नहीं है। डीडीएमए DDMA की आज हुई बैठक में पाबंदियां बढ़ाने पर फैसला हुआ पर लॉकडाउन अभी नहीं लगेगा।
लॉकडाउन लगना चाहिए या नहीं लगना चाहिए? इस सवाल पर आईआईटी कानपुर के मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल साफ कहते हैं कि इसका असर तो पड़ता है लेकिन मौजूदा हालात को समझना जरूरी है। सूत्र मॉडल से कोरोना की लहर और पीक का अनुमान लगाने वाले एक्सपर्ट ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का पीक मुंबई और दिल्ली में जनवरी के मध्य में आ सकता है। देशभर में अगले महीने की शुरुआत तक पीक आ सकता है।
हालांकि मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि पहली लहर के समय सख्त लॉकडाउन ने संक्रमण की रफ्तार रोक दी थी। दूसरी लहर के दौरान अलग-अलग राज्यों ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। जिन राज्यों ने हल्का या मीडियम लॉकडाउन लगाया, वे संक्रमण को फैलने से रोकने में कामयाब रहे। इस तरह लॉकडाउन हेल्प तो करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सख्त लॉकडाउन हेल्प तो करता है लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है। हम हमेशा कोविड के कारण मौतों की बात तो करते हैं लेकिन हमें उन मौतों के बारे में भी बात करनी चाहिए जो आजीविका छिनने के कारण होती हैं।
उन्होंने कहा कि शहरों के लिए, जहां हम जनवरी के मध्य में पीक की उम्मीद कर रहे हैं, वहां लॉकडाउन की कोई जरूरत नहीं है। हां, राज्यों में केस बढ़ रहे हैं। इधर तमिलनाडु ने लॉकडाउन लगाया, जो थोड़ा समय से पहले उठाया गया कदम लगता है क्योंकि इस समय अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत काफी कम हो रही है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि लॉकडाउन रणनीति कुछ इस तरह होनी चाहिए कि अगर हमारे अस्पतालों या मेडिकल सिस्टम पर बोझ नहीं बढ़ रहा तो इससे बचें। हमें पूरी आबादी को देखना है। वैसे भी, पहली लहर में लोगों के शहरों से पलायन, नौकरी छूटने जैसे घटनाक्रम से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने दूसरी लहर में इसे नहीं लगाया। स्थानीय स्तर पर जरूर कंटेनमेंट जोन और पाबंदियां लगाई गईं, जो तीसरी लहर में भी दिखाई दे रही हैं।