नई दिल्ली : कोरोना के कम होते केस के बीच एक बार फिर चीन ने अपने दुस्साहसी कदमों के जरिये LAC पर तनाव बढ़ा दिया है। इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर राफेल की तैनाती कर दी है, जिससे चीन के किसी भी गलत कदम का करारा जवाब दिया जा सकें। गौरतलब है कि चीनी वायु सेना ने हाल ही में भारतीय सीमा के करीब एक बड़ा युद्ध अभ्यास किया। इस अभ्यास के बाद भारतीय खुफिया एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं।
शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, ‘पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के उस पार चीन के 21-22 लड़ाकू विमानों ने अभ्यास किया है। इनमें मुख्य तौर पर J-11 फाइटर जेट्स शामिल थे जो रूसी लड़ाकू विमान Su-27 की नकल हैं। कुछ J-16 लड़ाकू विमान भी एक्सर्साइज में शामिल रहे।’ सूत्रों ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास उसी एयरबेस से किया गया, जहां से पिछले साल पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना ने अपने जवानों को सारी मदद पहुंचाई थी। सूत्रों के मुताबिक, किस हवाई अड्डे पर कितने लड़ाकू विमान मौजूद हैं, इसको छिपाने के लिए चीन ने कंक्रीट के स्ट्रक्चर खड़े किए हैं।
सूत्रों ने कहा कि भारत ने अपनी उच्च तैयारियों को बनाए रखने के लिए उत्तरी सीमाओं में राफेल लड़ाकू विमानों सहित अपने लड़ाकू विमान बेड़े को भी सक्रिय कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि भारत की नजर लद्दाख के सामने चीनी सीमा में स्थित काशगर, होतान, नगारी गुन्सा, शिगात्से, ल्हासा गोंगकर, न्यिंगची और चमडो पंगटा एयरबेस पर है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि शिनजियांग और तिब्बत स्वायत्त सैन्य क्षेत्र में स्थित सात चीनी सैन्य ठिकानों पर नजर रखने के लिए उपग्रहों और निगरानी के अन्य रूपों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के फॉरवर्ड एयरबेस को पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान भी एलएसी पर अभ्यास करते हुए दिखाई दिए हैं। बताया जा रहा है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स (PLAAF) ने हाल के दिनों में अपने कई एयरबेस को अपग्रेड किया है, जिसमें रहने के लिए कैंप का निर्माण, रनवे की लंबाई का विस्तार और अतिरिक्त फोर्स की तैनाती शामिल है।
सूत्रों ने बताया कि चीन ने भले ही पैंगोंग झील इलाके से अपने सैनिकों को पीछे हटाया है लेकिन उसने HQ-9 और HQ-16 जैसे अपने एयर डिफेंस सिस्टमों को नहीं हटाया है जो लंबी दूरी से ही किसी लड़ाकू विमान को टारगेट कर सकते हैं।