मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद गंभीर और व्यापक रूप ले चुका है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और यह टकराव अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इजरायल के हमलों में ईरान के इंटेलिजेंस चीफ एसमाइल खतीब और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लरिजानी के मारे जाने की खबरों के बाद ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है।
ईरान ने “ट्रू प्रॉमिस 4” ऑपरेशन के तहत इजरायल पर खोर्रमशहर-4 मिसाइलों से हमला किया, जिससे रामात गान में दो लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें ध्वस्त हो गईं। इसके अलावा ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। इराक में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया गया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात की तेल फील्ड और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, इजरायल ने भी ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड समेत 200 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। इन हमलों से ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इसी क्रम में कतर की एलएनजी सुविधाओं पर भी लगातार मिसाइल हमले हुए, जिससे बड़े पैमाने पर आग लगी और गंभीर नुकसान हुआ। हालांकि इन हमलों में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण की चेतावनी दी है और कहा है कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों, नौसेना और आतंकी नेटवर्क को खत्म करना है। इस पूरे घटनाक्रम से न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।