1. हिन्दी समाचार
  2. मध्य प्रदेश
  3. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल, बोले- मोदी सरकार का ‘पंच तीर्थ विकास’ का निर्णय ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल, बोले- मोदी सरकार का ‘पंच तीर्थ विकास’ का निर्णय ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर वर्तमान केंद्र सरकार ने ही वर्ष 2016 में यह पहल की। पंच तीर्थ के रूप में जिन स्थानों का विकास किया गया  है, उनमें महू (जन्मभूमि), लंदन (शिक्षा भूमि), नागपुर (दीक्षा भूमि), दिल्ली (महापरिनिर्वाण स्थल), और मुंबई (चैत्य भूमि) शामिल है।

By: Naredra 
Updated:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल, बोले- मोदी सरकार का ‘पंच तीर्थ विकास’ का निर्णय ऐतिहासिक

भोपालः मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां बौद्ध समाज और डॉ. अंबेडकर जयंती आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं महिला प्रकोष्ठ की सदस्यों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के तुलसी नगर स्थित डॉ. अंबेडकर मैदान में अंबेडकर जयंती कार्यक्रम को संबोधित किया।

बाबा साहब के योगदान को देखते हुए पंचतीर्थ का विकास- सीएम डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के समग्र योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा पंच तीर्थ का विकास किया गया, इससे पहले डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न दिया गया।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में संविधान के निर्माण और विधि, शिक्षा, दलित वर्ग के कल्याण आदि क्षेत्रों में डॉ. अंबेडकर की योगदान को देखते हुए रखते हुए पंच तीर्थ के विकास का यह ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके पूर्व की सरकारों ने डॉ. अंबेडकर की उपलब्धियां को महत्व नहीं दिया। उन्हें उनके जीवन में जो सम्मान दिया जा सकता था तत्कालीन सरकार द्वारा नहीं दिया गया। मध्यप्रदेश डॉ अंबेडकर की जन्म भूमि है। महू (डॉ. अंबेडकर नगर) में स्मारक के निर्माण सहित देश में पंच तीर्थ का विकास किया गया है। उनकी दीक्षाभूमि न सिर्फ नागपुर थी बल्कि लंदन में भी वे उच्च शिक्षा के लिए गए। इस नाते वहां स्मारक और पुस्तकालय का निर्माण किया गया है, जिसे देश-विदेश के लोग देखने पहुंचते हैं।

डॉ. अंबेडकर ने समाज के सभी वर्गों का किया सम्मान- डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजादी के उस दौर में जब अंग्रेजों को भगाकर देश को आजाद करने का संकल्प चल रहा था और ऐसे समय में जब देश सैकड़ों साल की गुलामी के बाद आजादी की तरफ कदम बढ़ा रहा था, ऐसे में हमारे समाज की कठिनाइयों का और आपस की कमजोरी का उचित समाधान करने के लिए डॉ. अंबेडकर आगे आए। समाज के अंदर हमारे अनुसूचित जाति, जनजाति ओबीसी सभी वर्गों के बीच की कठिनाइयों का समाधान जब तक नहीं करेंगे तब तक आने वाले समय में संकट  रहेगा। इस संकट को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने पहचाना कि हमें समाज को संगठित और एकत्रित रखना है। भारत के सभी वर्गों के बीच सम्मान का भाव रखना है। समानता का भाव लाना है। आपस की एकजुटता को बढ़ाना है। इसलिए सच्चे अर्थों में भारत की आत्मा में लोकतंत्र का दीपक जलाने के लिए मध्य प्रदेश के लाल संविधान के शिल्पी डॉ. भीमराव अंबेडकर को आज सभी कोटि-कोटि नमन करते हैं।

‘डॉ. अंबेडकर का जन्मस्थान (महू) पवित्र धरती’

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि  बाबा साहब अंबेडकर के अनुयायियों के लिए उनके जन्म स्थान को तीर्थ स्थान बनाने का काम किया गया है। महू की धरती पवित्र धरती है। भारत के पहले विधि मंत्री, भारतीय संविधान के जनक और भारतीय गणराज्य के निर्माता के सम्मान में पंच तीर्थ बनाने के लिए पूरी ताकत लगाई गई और वे तीर्थं दुनिया के सामने स्थापित हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर वर्तमान केंद्र सरकार ने ही वर्ष 2016 में यह पहल की। पंच तीर्थ के रूप में जिन स्थानों का विकास किया गया  है, उनमें महू (जन्मभूमि), लंदन (शिक्षा भूमि), नागपुर (दीक्षा भूमि), दिल्ली (महापरिनिर्वाण स्थल), और मुंबई (चैत्य भूमि) शामिल है।

‘बाबा साहब का स्लोगन देता है ताकत’

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर को समर्पित महू और नागपुर हैं जहां बाबा साहब का जन्म हुआ, उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा प्राप्त की, वो दीक्षा भूमि नागपुर और शिक्षा भूमि लंदन भी है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता है जब मैं लंदन गया तो मैंने बाबा साहब अंबेडकर की शिक्षा भूमि को भी देखा और वह मकान भी देखा। आज वह तीर्थ  दुनिया के सामने  है। समाधि स्थल का  भी विकास हुआ है। दीक्षा भूमि भी आस्था का केंद्र है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि आज आपके बीच में मैं केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि सच में बाबा साहब का वह स्लोगन जो हम सबको ताकत देता है, शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वो ताकतवर होगा। वे शिक्षा के महत्व को सदैव प्रतिपादित करते रहे। इसलिए हम सब उनके इस स्लोगन को भी याद रखते हैं।

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...