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इतिहास दोहरा पायेगी एयर इंडिया ! क्या टाटा ग्रुप को मिलेगी ज़िम्मेदारी

By: RNI Hindi Desk 
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इतिहास दोहरा पायेगी एयर इंडिया ! क्या टाटा ग्रुप को मिलेगी ज़िम्मेदारी

भारत सरकार ने हाल ही में एलान किया है कि एयर इंडिया की 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचने की वो तैयारी कर रही है,और इस खबर के बाद सबकी निगाहे टाटा समूह पर है और कयास लगाए जा रहे है कि 88 साल बाद अब इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहरा सकता है।

दरअसल ऐसी ख़बरें हैं टाटा समूह ने भारी घाटे से जूझ रही एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. टाटा समूह एयर इंडिया को खरीदने के अपने प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के काफ़ी करीब है और वो सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर कंपनी के अधिग्रहण को अंजाम देने की तैयारियां शुरू कर चुका है.

भारत सरकार ने इसके मद्देनज़र अपने प्रस्ताव सौंपने की आख़िरी तारीख़ 17 मार्च, 2020 रखी गई है. 31 मार्च तक सरकार खरीदार के नाम की घोषणा करेगी. अगर आर्थिक नज़रिये से देखे तो एयरलाइन्स पर लगभग 60 हज़ार करोड़ रूपये का कर्ज़ है लेकिन अगर कोई इसे खरीदता है तो उसे 23,286 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे और बाकी का कर्ज़ ख़ुद सरकार उठाएगी।

अगर शर्त की बात करे तो केंद्र सरकार की शर्तों के मुताबिक़ एयर एंडिया के खरीदार की नेट वर्थ कम से कम 3,500 करोड़ होनी अनिवार्य है जिसके हिसाब से टाटा को एयर इंडिया खरीदने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली है।

टाटा की कमाई की बात करे तो पिछले वित्त वर्ष में इसका रेवेन्यू 729,710 करोड़ था. वहीं 31 मार्च,2019 को टाटा समूह की मार्केट कैपिटल 11 लाख करोड़ था और इस वक़्त एयर इंडिया के पास अच्छी एयरोनॉटिकल संपत्ति है यानी अच्छे हवाई जहाज़, प्रशिक्षित पायलट, इंजीनियर और अन्य प्रशिक्षित स्टाफ़ हैं. कंपनी के दुनिया के कई शहरों में स्लॉट्स हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एयर इंडिया के लगभग 18 फीसदी, राष्ट्रीय बाज़ार में लगभग 13 फीसदी शेयर हैं.

इन सबको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि टाटा की एयर इंडिया में दिलचस्पी युहीं नहीं है, आपको बता दे कि उद्योगपति जेआरडी टाटा ने भारत की आज़ादी से पहले ही 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी.

29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस ‘पब्लिक लिमिटेड’ कंपनी बन गयी और उसका नाम बदलकर ‘एयर इंडिया लिमिटेड’ रखा गया. आज़ादी के बाद यानी 1947 में टाटा एयरलाइंस की 49 फ़ीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी. 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण हो गया था.

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