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तालिबान का अफगानिस्तानी नागरिकों को फरमान, महिलाएं न निकले अकेले घर से बाहर, पुरूष न बनाएं दाढ़ी और…

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : अमेरिकी प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान से कूच करने के बाद तालिबान लगातार अफगानिस्तान के इलाकों पर अपना कब्जा जमा रहा है और अपने कानून को चला रहा है। हालांकि इस दौरान अफगानिस्तानी सैनिकों ने भी उनका मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन सैनिकों का आधुनिक प्रशिक्षण न होने और अस्त्र-शस्त्र की कमी होने का कारण तालिबान निरंतर अफगानिस्तान पर हावि होता जा रहा है।

आपको बता दें कि तालिबान ने उत्तरी अफगानिस्तान के एक जिले पर कब्जा जमाने के बाद स्थानीय इमाम को एक पत्र के जरिये अपना पहला आदेश जारी किया है। कलाफगन जिले के निवासी 25 साल सेफतुल्लाह ने एएफपी को बताया कि फरमान में कहा गया है कि महिलाएं मर्दों के बिना बाजार नहीं जा सकती हैं, और पुरुषों को अपनी दाढ़ी रखनी है। तालिबान ने सिगरेट, बीड़ी पीने पर भी रोक लगा दी है और चेतावनी दी है कि अगर किसी ने नियम-कायदों का उल्लंघन किया तो उनके साथ गंभीरता से निपटा जाएगा।

बता दें कि पिछले महीने, तालिबान ने एक उत्तरी सीमा शुल्क चौकी शिर खान बंदर पर कब्जा कर लिया था। पंज नदी पर अफगानिस्तान को ताजिकिस्तान से जोड़ने वाले अमेरिका निर्मित पुल पर यह चौकी स्थित है। एक फैक्टरी में काम करने वाली सजदा ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि शिर खान बंदर पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने महिलाओं को अपने घरों से बाहर नहीं निकलने का आदेश जारी किया है।

सजदा ने बताया कि कई महिलाएं और युवा लड़कियां कढ़ाई, सिलाई और जूता बनाने का काम कर रही थीं। लेकिन तालिबान के आदेश से अब वे सब डरी, सहमी हुई हैं।

गौरतलब है कि तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया। उस दौरान महिलाओं को घर के अंदर रहने का आदेश था, जब तक कि कोई पुरुष रिश्तेदार साथ न हो, उन्हें बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति नहीं थी, और व्यभिचार जैसे अपराधों में दोषी पाए जाने वालों को मौत के घाट उतार दिया जाता था। तालिबान न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 9/11 हमले के बाद अमेरिका के निशाने पर आया।

महिलाओं की अपेक्षाकृत मर्दों को ज्यादा आजादी थी, लेकिन उन्हें दाढ़ी बनाने की मनाही थी। नमाज में शामिल नहीं होने पर लोगों को पीटा जाता था और सबको पारंपरिक पोशाक पहनने को कहा जाता था।

अफगानिस्तान बेहद रूढ़िवादी है और देश के कुछ ग्रामीण इलाके तालिबान की निगरानी के बिना भी इसी तरह के नियमों का पालन करते हैं। लेकिन तालिबान ने इन रूढ़ियों को और भी कठोरता से लागू करने की कोशिश की है।

तालिबानी लड़ाकों से करें बेटियो का ब्याह : इस सप्ताह सोशल मीडिया पर वायरल तालिबान के कथित बयान में ग्रामीणों को अपनी बेटियों और विधवाओं की शादी विद्रोही लड़ाकों से करने का आदेश दिया गया है। तालिबान के कल्चरल मिशन के नाम से जारी पत्र में कहा गया है कि कब्जे वाले इलाकों के सभी इमाम और मुल्ला तालिबान को 15 साल से ऊपर की लड़कियों और 45 साल से कम उम्र की विधवाओं की सूची तालिबान लड़ाकों से शादी के लिए मुहैया कराएं। हालांकि इस बार अपनी नरम छवि को पेश करने वाले तालिबान ने इन बयानों से किनारा कर लिया है और कहा है कि उसने इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि, “ये निराधार दावे हैं। ये फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके फैलाई गई अफवाहें हैं।” 

रात में घर से निकलने पर रोक: तालिबान भले ही इन बयानों से किनारा करे लेकिन कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले लोग कह रहे हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट सच्ची है। 32 साल के नजीर मोहम्मद ने एएफपी को बताया कि, “उनके कमांडरों ने हमें बताया कि रात में किसी को भी घर से निकलने की इजाजत नहीं है।” उन्होंने अफगान ध्वज के रंगों का जिक्र करते हुए कहा कि, “और कोई भी शख्स-विशेष रूप से युवा- लाल और हरे रंग के कपड़े नहीं पहन सकता है।”

मोहम्मद नजीर ने बताया कि, “तालिबान के आदेश के मुताबिक हर किसी को पगड़ी पहननी चाहिए और कोई भी आदमी दाढ़ी नहीं बना सकता है। छठी कक्षा से आगे के स्कूलों में जाने वाली लड़कियों को पढ़ने से रोक दिया गया था।”

तालिबान जोर देकर कहते हैं कि वे मानवाधिकारों की रक्षा करेंगे, विशेष रूप से महिलाओं की। लेकिन केवल इस्लामी मूल्यों के अनुसार, जिनकी मुस्लिम दुनिया में अलग-अलग व्याख्या की जाती है।

ताजिकिस्तान सीमा पर सजदा ने बताया कि उसके लिए तालिबान के शासन के कुछ ही दिन काफी थे। बाद में वह कुंदुज़ शहर में भाग गई। सजदा ने कहा कि हम तालिबान के शासन में कभी काम नहीं कर पाएंगे। इसलिए हमने अपना घर छोड़ दिया।

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