रतन टाटा का टाटा समूह में आगमन 1962 में हुआ। टाटा ने 1991 में जेआरडी टाटा के निधन के बाद चेयरमैन का पद संभाला। उनके कार्यकाल की विशेषता साहसिक निर्णय और रणनीतिक दूरदर्शिता है जिसने समूह को एक वैश्विक इकाई में तब्दील करके विश्व पटल पर कंपनी का नाम फेमश किया।
