उज्जैनः हाल ही में संन्यास लेने वाली स्वामी हर्षानंद गिरि एक बार फिर सुर्खियों में हैं। संन्यास को लेकर उठे विवाद के बीच उन्होंने संतों के आरोपों पर तीखा जवाब दिया है। उन्होंने सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि फॉरेन फंडिंग साबित करें, वरना एक करोड़ रुपए की मानहानि भरें।
उज्जैन में संन्यास लेने के बाद चर्चा में आईं स्वामी हर्षानंद गिरि, जो पहले हर्षा रिछारिया के नाम से जानी जाती थीं, ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है।

उन्होंने कहा कि वे 2019 से उत्तराखंड में रहकर साधना कर रही थीं। ऐसे में बिना जानकारी के उन पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने संतों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उन्हें विदेश से फंडिंग मिली है, तो वे जवाब देने को तैयार हैं। लेकिन यदि आरोप गलत साबित हुए, तो एक करोड़ रुपए की मानहानि दी जाए।
स्वामी हर्षानंद गिरि ने यह भी कहा कि जब कुछ संतों के पुराने रिकॉर्ड सामने आते हैं, तो वे काफी गंभीर और डरावने होते हैं। लेकिन उस समय कोई आवाज नहीं उठाता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुछ मामलों में संतों पर आरोप लगे, यहां तक कि यौन शोषण के मामलों में शिकायतें थाने तक पहुंचीं, तब विरोध क्यों नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पहनावे या जीवनशैली को लेकर टिप्पणी करना गलत है।
दरअसल, हाल ही में उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि द्वारा संन्यास दीक्षा दी गई थी। जिसके बाद से ही उनके संन्यास को लेकर संत समाज के एक वर्ग ने सवाल खड़े किए थे।
अब इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां एक तरफ संत समाज का विरोध है। तो दूसरी तरफ स्वामी हर्षानंद गिरि खुलकर जवाब दे रही हैं और यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
उज्जैन से संवाददाता प्रियंक की रिपोर्ट