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सासाराम में दिव्यांग महिला की बेबसी आई सामने, इलाज के लिए अस्पताल में रेंगते हुए पहुंची भारती कुमारी

सासाराम सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची दिव्यांग महिला भारती कुमारी को अस्पताल परिसर में रेंगते हुए देखा गया। सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होने की उनकी कहानी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

By: BS Yadav 
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सासाराम में दिव्यांग महिला की बेबसी आई सामने, इलाज के लिए अस्पताल में रेंगते हुए पहुंची भारती कुमारी

सासाराम। सरकार की ओर से दिव्यांगजनों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कई जरूरतमंद लोग इन सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसा ही एक मार्मिक मामला रोहतास जिले के सासाराम से सामने आया है, जहां दोनों पैरों से दिव्यांग एक महिला इलाज के लिए सदर अस्पताल परिसर में रेंगते हुए नजर आई।

सासाराम के खरारी गांव की रहने वाली भारती कुमारी पिछले लगभग 30 वर्षों से दिव्यांगता की शिकार हैं। दोनों पैरों से चलने में असमर्थ भारती की देखभाल उनके भाई करते हैं। दिव्यांगता के कारण उनकी शादी भी नहीं हो सकी। हाल के दिनों में मौसमी बीमारी से तबीयत बिगड़ने पर वह किसी तरह ऑटो से सासाराम सदर अस्पताल पहुंचीं।

 

अस्पताल पहुंचने के बाद भारती कुमारी को एक विभाग से दूसरे विभाग और डॉक्टर से जांच केंद्र तक पहुंचने के लिए रेंग-रेंग कर जाना पड़ा। भीषण उमस और गर्मी के बीच अस्पताल परिसर में उनकी यह स्थिति देखने वालों को भावुक कर गई। किसी तरह उन्होंने पर्ची कटवाई, डॉक्टर से परामर्श लिया और जांच कराई। इलाज के बाद भी उन्हें अस्पताल से बाहर निकलकर ऑटो तक पहुंचने के लिए जमीन पर घिसटते हुए जाना पड़ा।

भारती कुमारी ने बताया कि उन्हें वर्तमान में सरकार की ओर से करीब 1100 रुपये प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन मिल रही है। हालांकि उन्हें अब तक ट्राइसाइकिल, आवास योजना या अन्य सहायक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि जानकारी के अभाव में वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह गई हैं, जिससे दैनिक जीवन और आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इस मामले पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग के सहायक निदेशक आफताब करीम ने कहा कि यदि संबंधित महिला आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करती हैं, तो पात्रता के अनुसार उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन दोनों जरूरी हैं। साथ ही अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में दिव्यांगजनों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता भी इस घटना से स्पष्ट होती है।

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