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राष्ट्रपति के दौरे से पहले बैतूल में बड़ा सुरक्षा सवाल, तेज हवा में गिरा राष्ट्रपति का फ्लेक्स, पत्रकार घायल

बैतूल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम से पहले तेज हवा और बारिश में राष्ट्रपति का विशाल फ्लेक्स गिर गया। हादसे में एक पत्रकार घायल हो गए, जिसके बाद सुरक्षा और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

By: BS Yadav 
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राष्ट्रपति के दौरे से पहले बैतूल में बड़ा सुरक्षा सवाल, तेज हवा में गिरा राष्ट्रपति का फ्लेक्स, पत्रकार घायल

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले कार्यक्रम स्थल पर हुई एक घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज हवा और बारिश के दौरान राष्ट्रपति के स्वागत के लिए लगाया गया विशाल फ्लेक्स अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में आकर एक पत्रकार घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने और कवरेज करने के लिए दैनिक भास्कर के ब्यूरो प्रमुख बसंत चौहान कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। इसी दौरान मौसम खराब होने लगा और बारिश शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि वे वीवीआईपी प्रवेश द्वार के समीप खड़े थे, तभी तेज हवा के झोंकों के बीच लोहे की फ्रेम पर लगाया गया विशाल फ्लेक्स उखड़कर सीधे उनके ऊपर आ गिरा।

हादसे में पत्रकार बसंत चौहान को चोटें आईं और उनके हाथ में मोच आने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया। फिलहाल उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है।

इस घटना ने कार्यक्रम स्थल पर किए गए अस्थायी निर्माण कार्यों की मजबूती, सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उस समय वहां अधिक संख्या में लोग मौजूद होते या फ्लेक्स किसी अन्य दिशा में गिरता, तो गंभीर हादसा हो सकता था।

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि कार्यक्रम से पहले हुई इस घटना ने उन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि वीवीआईपी कार्यक्रमों के लिए तैयार किए जा रहे ढांचों और सजावट कार्यों की गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट : कमलाकर तायवाड़े

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