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मां की मेहनत और बेटियों के हौसले की मिसाल बनीं सुषमा, NET-JRF में हासिल की सफलता

जहानाबाद की सुषमा कुमारी ने दूसरे प्रयास में NET-JRF परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 93 हासिल की। पिता के निधन के बाद मां ने पांच बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। सुषमा अब प्रोफेसर बनने के साथ वैज्ञानिक बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।

By: Nivedita 
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मां की मेहनत और बेटियों के हौसले की मिसाल बनीं सुषमा, NET-JRF में हासिल की सफलता

जहानाबाद:  शहर के गौरक्षिणी स्थित संगम घाट निवासी सुषमा कुमारी ने NET-JRF परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 93 प्राप्त की। इस उपलब्धि के बाद सुषमा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए प्रोफेसर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं।

पांच बेटियों वाले परिवार में शिक्षा की मजबूत नींव

सुषमा पांच बहनों में से एक हैं। उनकी दो बहनें शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, जबकि एक बहन सरकारी क्लर्क हैं। परिवार में बेटियों की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई। पिता के निधन के बाद मां ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और बेटियों को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार की चार बेटियां शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वहीं, सुषमा का भाई भागलपुर में इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा है।

 

बायोटेक्नोलॉजी में की पढ़ाई

सुषमा ने अपनी शुरुआती शिक्षा जहानाबाद के एक सीबीएसई विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एसएस कॉलेज से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक किया और इसी विषय में एमएससी की डिग्री पूरी की। NET की पहली परीक्षा में वह निर्धारित अंक से छह अंक पीछे रह गई थीं और केवल NET क्वालीफाई कर सकीं। इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और दूसरी कोशिश में NET-JRF के साथ ऑल इंडिया रैंक 93 हासिल की।

वैज्ञानिक बनने का है लक्ष्य

सुषमा का कहना है कि परिवार के सहयोग और निरंतर मेहनत ने उन्हें यह सफलता दिलाई। वह भविष्य में वैज्ञानिक बनना चाहती हैं और इसे अपने अगले लक्ष्य के रूप में देख रही हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता। असफलता से निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत से सफलता का रास्ता जरूर बनता है।

 

रिपोर्ट – बरुण कुमार

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