रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला को बुधवार को बड़ी राहत दी है। आपको बता दें कि फारुख अब्दुल्ला पर अनुच्छेद 370 हटाये जाने की पर दिए गये बयान के लिए देशद्रोह का मामला चलाए जाने की मांग की गई थी। इस जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भिव्यक्ति को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता है। फारुख अब्दुल्ला के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि सरकार की राय से अलग विचार रखना देशद्रोह नहीं कहा जा सकता। इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस हेमंत गुप्ता और संजय किशन कौल की बेंच ने कहा कि किसी के असंतोष को देशद्रोह नहीं कह सकते।
A bench of the Supreme Court, headed by Justice Sanjay Kishan Kaul, while refusing to entertain a PIL against former J&K CM Farooq Abdullah, observed that the expression of views that are different from the opinion of the government cannot be termed as seditious pic.twitter.com/sn2Ptxf5mb
— ANI (@ANI) March 3, 2021
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी रजत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर की। सुप्रीम कोर्ट ने फारुख अब्दुल्ला के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
याचिकाकर्ताओं ने फारुख अब्दुल्ला पर आरोप लगाया था कि उन्होने भारत के खिलाफ अनुच्छेद 370 पर चीन की मदद मांगी थी। आपको बता दें कि फारुख अब्दुल्ला की पार्टी ने पहले ही इन बातों को नकार चुकी है। इसमें दावा किया गय़ा है कि एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान फारुक अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन की मदद से संविधान के अनुच्छेद 370 को कश्मीर घाटी में बहाल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने जिस याचिका को खारिज किया है, उसमें मांग की गई थी कि फारुख अब्दुल्ला ने जो किया वह देश के हित के खिलाफ गंभीर अपराध है इसलिए उन्हें संसद से हटाया जाए।