गाजीपुर: मंगलवार को जनपद में राजनैतिक जगत में भी काफी हलचल होने के क्रम में आज सुभाष पासी ने साइकिल की सवारी छोड़ अब कमल के फुल का दामन पकड़ने का ऐलान कर दिया है। विधायक सुभाष पासी ने कहा कि समाजवादी पार्टी में दलितो का सम्मान नही होता है इसलिए हमने भाजपा के नीतियो में विश्वास करते हुए कमल के फुल पर आस्था जताई है और आज दोपहर में हम भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
ज्ञातव्य है कि विधायक सुभाष पासी की गिनती सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के नजदीकियो में होती है, विधायक सुभाष पासी ने जिले में पहली बार समाजवादी पार्टी में बम्बईयो स्टाइल में प्रचार करने व गांव के महिलाओ में नेटवर्क बनाने का सफल प्रयोग किया था, विधायक सुभाष पासी ने 2012 और 2017 के विधानसभा में साइकिल चुनाव चिन्ह पर ऐतिहासिक जीत दर्ज किया था।
2017 में भाजपा के विद्यासागर सोनकर को हराया था
सुभाष पासी मूल रूप से मालवीय नगर, नगर पंचायत सैदपुर के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी रीना पासी जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सुभाष ने वर्ष 1975 में पुणे बोर्ड महाराष्ट्र से हाईस्कूल तक की शिक्षा प्राप्त की। साल 2012 में चुनाव लड़े और विधायक बन गए। इनका मुख्य कारोबार मुंबई में है और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। सुभाष पासी का सपा से बाहर होना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। सुभाष पासी ने 2017 में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विद्यासागर सोनकर को हराया था। उस चुनाव में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत सैदपुर में झोंक दी थी।