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बेटे ने मां को 62 बार चाकू से गोदा- दिल गुर्दा आंत निकाल उसपर नमक छिड़कर खाया, कहानी सुन जज के भी छूटे पसीने, कहा…

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

कोल्हापुर: आज से चार साल पहले 2017 में एक युवक ने अपनी मां की इतनी बेरहमीं से हत्या की थी, कि सुनने और जानने वालों के रुह कांप गये थे। युवक ने अपनी मां की हत्या कर उनके दिल,गुर्दे और आंतें निकाल कर खाने लगा था। इस मामले में स्थानीय कोर्ट ने आरोपी बेटे को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि मैं आज तक ऐसा मामला नहीं देखा। आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आरोपी 35 साल का सुनील कुचिकोरवी वारदात के बाद से ही जेल में बंद था।

आपको बता दें कि कोल्हापुर के मक्कडवाला वसाहट में 28 अगस्त 2017 को एक वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी ने 62 बार मां को चाकू गोदा। बुजुर्ग महिला का शव अलग-अलग हिस्सों में मिला था। शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर नमक मिर्च लगा था।

इसके बाद पुलिस ने जब आरोपी को पकड़ा था तब उसके मुंह से खून टपक रहा था। पुलिस की मानें तो, उसने मां के शरीर के कई हिस्सों को खाया था। आरोपी ने भी मां के अंग खाने की बात कबूल की थी। जांच में पता चला था कि आरोपी सुनील ने शराब पीने के लिए मां से पैसे मांगे थे। मां ने शराब के लिए पैसे देने से मना कर दिया था। ये बात सुनील को इतनी बुरी लगी कि उसने मां की हत्या कर दी।

वारदात को अंजाम देने के बाद सुनील ने अपनी मां के शरीर के दाहिने हिस्से को चीर दिया। फिर गुर्दा, दिल और आंत निकालकर अलग रख दिया। फिर उसमें नमक मिर्च लगाकर खाने लगा। इस केस में 12 लोगों ने गवाही दी थी। आरोपी के रिश्तेदार और पड़ोसियों ने कोर्ट के सामने वारदात की पूरी कहानी बताई थी। सभी ने इस बात का जिक्र किया था कि शराब पीने के बाद आरोपी कंट्रोल में नहीं रहता है।

इस जघन्य वारदात के मामले में सरकारी वकील विवेक शुक्ला ने मौत की सजा की मांग की थी, और कहा था कि  ये दुर्लभतम से दुर्लभतम मामला है। उन्होंने कहा, मैंने फांसी की मांग की। आरोपी समाज के लिए खतरा है। अगर पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंचती तो स्थानीय लोगों ने उसकी हत्या कर दी होती। उसकी पत्नी और बच्चे भी उसे छोड़कर चले गए हैं।

जबकि दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील विजय लम्बोरे ने तर्क दिया कि यह मामला मौत की सजा देने के लिए दुर्लभ से दुर्लभ मानदंड में फिट नहीं है। लम्बोरे ने कहा, हमने फांसी नहीं देने की गुहार लगाई क्योंकि अपराध पागलपन में किया गया था। ऐसी कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं है जिसमें दिखाया गया हो कि वह अपनी मां की हत्या के बाद उसके शरीर के अंगों को खाया हो।

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