रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। महामारी के इस दौर में लोग अनजाने व्यक्ति की मदद करने को अपनी जान तक हथेली पर रख दे रहें हैं। इस सब के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे। रविवार को शाम 80 साल की बिमार महिला को उसके ही दो बेटों कान सिंह और अपर सिंह बुढ़ी मां को लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां बुढ़ी मां का इलाज शुरु किया गया।
आपको बता दें कि बुढ़ी मां के दोनो बेटों ने व्योरा भरने वाले फॉर्म को तो भरा लेकिन उसमें अपना मोबाइल नंबर देने के बदले अपने बहनोई का नंबर लिखवाकर वहां से दोनो चुपके से भाग लिये। बुजुर्ग मां को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। उन दोनो को लगा कि मां को कोरोना हो गया है। वहीं बुजुर्ग मां का ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था। उसे इमरजेंसी से कोविड ओल्ड इमरजेंसी वार्ड में भेजा गया। और फिर परिजनों को खोज जाने लगा। लेकिन वहां कोई नहीं मिला।
इसके बाद हॉस्पिटल के स्टाफ ने फार्म पर लिखाये गये नंबर पर कॉल किया, जिसे महिला के दामाद सुखवीर सिंह ने रिसीव किया। सुखवीर ने कहा कि तेजमालता गांव में है और आते आते देरी हो जायेगी। उसने हॉस्पिटल स्टाफ को महिला के बेटों का मोबाइल नंबर दे दिया। आपको बता दें कि हद तो तब हो गयी जब स्टाफ ने बेटों का नंबर मिलाया तो उन कलयुगी बेटों ने मां को पहचानने से ही इंकार कर दिया।
वहीं महिला का दामाद सुखबीर रात में करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचा। उसने सासू मां का हाल-चाल जाना। इधर अस्पताल के मेल नर्स ने बताया कि रविवार देर शाम महिला को इमरजेंसी वार्ड से कोविड ओल्ड इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया था। महिला के बेटों ने फोन भी नहीं उठाया। सोमवार को जब महिला की मौत हो गयी तब उसकी जानकारी बेटों को दी गयी। उसके बाद दो में से एक बेटा अस्पताल पहुंचा। महिला का अंतिम संस्कार दामाद और समाज के लोगों ने किया।