रिपोर्ट : धरमिंदर ठाकुर / मोहम्मद आबिद
भगवान शिव की अपार महिमा है और अनेक कथाएं भी है जो समाज में प्रचलित हैं, महादेव के महापर्व शिवरात्रि को लेकर देश भर में उत्साह है ओर ऐसा ही उत्साह देवभूमि हिमाचल में भी देखने को मिल रहा है।
भगवान शिव की अपार महिला है और काठगढ़ में स्थापित भगवान शिव का पुरातन मंदिर के बारे में कई प्रथाएं प्रचलित हैं कहा जाता है की यहां खुद भगवान शिव खुद मौजूद हैं और भगवान के शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है और शिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग एक साथ जुड़ जाते हैं और शिवरात्रि के बाद अलग हो जाते है।
शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बसे छोटे से गांव काठगढ़ में सतयुग से भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है और देश विदेश से लोग इस मंदिर में माथा टेकने पहुचते हैं, मान्यता है कि मंदिर को गिराने के लिए राजा सिकन्दर ने कई बार आक्रमण किया था लेकिन हर बार वो असफल रहा था क्योंकि हर बार ब्यास दरिया इस मंदिर की डाल बन कर खड़ा रहा जिसकी वजह से सिकंदर को हर बार हार का सामना करना पड़ा था।
माना जा रहा है की आज भी इस मंदिर में वो शॉकिंग मौजूद है जो 2 भागों ने बंटा हुआ है जो शिवरात्रि की रात को एक हो जाते है और उस के बाद अलग अलग होना शुरू हो जाते है जिस वजह से लोगों की इस मंदिर में अपार श्रद्धा है और भक्त यहां पहुंचकर अपनी मन्नतें पूरी करते हैं।
भगवान शिव के मंदिर में पुजारी का कहना है की शिवलिंग सतयुग से जहां स्थापित है और कई बार इस मंदिर को गिराने के लिए राजाओं ने प्रयास किये गए लेकिन हर बार ब्यास दरिया ने मंदिर की रक्षा की और भगवान शिव का शिवलिंग 2 भागों में बटा हुआ है जिस शिव और पार्वती के रूप में जाना जाता है जो शिवरात्रि की आपस में जुड़ जाते है और बाद में अलग हो जाते हैं।