सामाजिक सुधारक और जाने माने शिया धर्मगुरु डॉ. कल्बे रुशैद रिज़वी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत भारत के लोगों को खाद्य आपूर्ति का अधिकार देने की मांग करते हुए इसे मूल आवश्यकताओं में से एक के तहत आवशयक बनाने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग की है।
कारगिल शहीद दिवस के मौक़े पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए डॉक्टर कल्बे रुशैद रिज़वी ने देश के हर नागरिक को भोजन का अधिकार देने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर मोदी हुकूमत उनकी मांग को मानती है तो ये कारगिल के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. कल्बे रुशैद रिज़वी ने भारत के असली नायकों के बारे में बात करते हुए कहा कि, हमारे नायकों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि पेश करने का सबसे अच्छा तरीका यही है
हम अपने देश के हर एक जरूरतमंद तक भोजन पहुंचाने की वयवस्था करें, उन्होंने कहा की देश में किसी भी व्यक्ति की भूखे पेट मृत्यु ना होने पाए इसके लिए हम सबको मिल कर काम करने की ज़रूरत है।
डॉ. कल्बे रुशैद रिज़वी ने कहा कि भारत शुरु से ही एक ऐसा देश रहा है जो अपने आपमें बहुत ही सक्षम था और जिसके पास दैनिक आधार पर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता और संसाधन थे,
लेकिन आज जब कई सूबों से लोगों के भूखों मरने की खबरें आती हैं तो हम सबको अंदर तक झकझोर देती हैं।
इस मौक़े पर डॉ. कल्बे रुशैद रिज़वी ने भारत सरकर से अनुरोध किया कि उनकी मांग पर जल्द विचार किया जाना चाहिये ताकि अपने देश में भूख से होने वाली मौतों को रोका जा सके।
कोरोना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वक़्त हम सबके लिये एक परीक्षा की घड़ी है, हम सबको एकजुट्ता के साथ कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई को और मज़बूती के साथ लड़ना हैं।
डॉ. कल्बे रुशैद रिज़वी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने और देश की हिफाज़त के लिए अपनी जान क़ुर्बान करने वाले देश के वीर जवानों को याद करने और उन्हें सच्चा सम्मान देने का वक़्त आ गया है और देश की जनता को भोजन का अधिकार देकर हम इस ओर पहला क़दम बढ़ायेंगे।