जितेंद्र शर्मा { एडिटर इन चीफ }
मुस्कान को शास्त्रों में कहीं-कहीं हवन बताया है। हवन में शुभ सामग्रियों की आहुतियां दी जाती है। और उससे जो धूनी निकलती है। उसकी पवित्रता से सारा वातावरण शुद्ध हो जाता है।
हंसी को, मुस्कान को हवन इसलिए कहा गया है कि जीवन के यज्ञ कुंड में अपनी प्रसन्नता की आहुति दीजिए और आसपास के वातावरण को पॉजिटिव करिए। क्योंकि संघर्ष के दौर में तनाव उदासी व चिड़चिड़ापन नुकसान पहुंचाएगा।
श्री राम-रावण युद्ध में हनुमान जी के नेतृत्व में वानर रावण का यज्ञ ध्वस्त कर चुके थे, रावण फिर से युद्ध मैदान में पहुंच गया तब देवताओं ने राम जी से कहा. इस दुष्ट को और ने खेलाते हुए इसे मार दीजिए। इस दृश्य पर बाबा तुलसीदासजी ने लिखा-
देव बचन सुनि प्रभु मुसुकाना
उठी रघुबीर सुधारे बाना
देवताओं की बात सुन श्रीराम मुस्कुराए और फिर अपने बाण तैयार किए एक तरफ युद्ध खड़ा है, हिंसा हो रही है दूसरी ओर रामजी मुस्कुरा रहे हैं।
राम संदेश देना चाहते हैं कि रावण से युद्ध करते हुए मैं किसी प्रकार की तनाव और दबाव में नहीं हूं।
बड़े काम आंतरिक प्रसन्नता के साथ किए जाने चाहिए और मुस्कान उस का झोंका है रावण नई-नई शक्लो में इन दिनों हमारे आसपास है आप कितने ही परेशान हो प्रसन्नता मत छोड़िएगा।
उस प्रसन्नता को प्रेरणा देने के लिए मुस्कान हैं, हर विपरीत समय में भी मुस्कुराते रहिए…!