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इमाम बुख़ारी ने दी पीएम मोदी को जामा मस्जिद आने की दावत…

आर एन आई न्यूज़ की टीम ने शाही जामा मस्जिद की जर्जर हालत का लिया जायज़ा शाही इमाम से की ख़ास बातचीत, जो भी परेशानियां हैं उनको समझने की कोशिश की।

By RNI Hindi Desk 
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नई दिल्ली: बाहर से अज़ीमुश शान और पुख़्ता नज़र आने वाली 400 साल पुरानी तारीख़ी शाही जामा मस्जिद अंदर से किस क़द्र खोखली हो चुकी है इसका अंदाज़ा उस वक़्त हुआ जब आर एन आई न्यूज़ की टीम ने न केवल शाही इमाम सैयद अहमद बुख़ारी से बात की बल्कि अंदर से जाकर मस्जिद की जर्जर हालत भी देखी। ज़ायज़ा लेते हुए मालूम हुआ कि अगर जल्द मस्जिद की पुख़्ता मरम्मत न कराई गई तो पूरी मस्जिद ढह जायेगी। शाही इमाम ने बात करते हुए कहा कि फ़िलहाल हम प्राथमिक उपचार के तौर पर सीमेंट से कुछ बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन माहरीन का कहना है कि सीमेंट का इस्तेमाल इमारत के लिए हानि कारक है। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग से लेकर पीएम मोदी तक को ख़त लिखा है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

ए एस आई ने पहले कुछ काम किया है लेकिन उससे कुछ होने वाला नहीं है ,इसमें काफ़ी वक़्त और काफी पैसा चाहिए। शाही इमाम ने कहा कि यह सही है कि शाही जामा मस्जिद पुरातत्व विभाग के मातहत नही है लेकिन स्पेशल केस में वह मरम्मत करा सकता है क्यूंकि यह मस्जिद मुल्क का अज़ीम सरमाया है जहाँ देश और दुनिया से लोग आते हैं। दूसरे देशों के राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री भी आते हैं।

एक सवाल के जवाब में शाही इमाम ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ख़ुद आकर जामा मस्जिद को देखते हैं यह अच्छी बात है मैं उनको दावत देता हूँ। उन्होंने कहा कि स्पेशल केस में जवाहर लाल नेहरू के दौर में तीस साल तक जामा मस्जिद की मरम्मत का काम चला था। इमाम बुख़ारी ने कहा कि मेरी आग़ा खान फाउंडेशन से बात हुई है , उन्होंने कोई तहरीरी जवाब नहीं दिया लेकिन यह कहा है कि अगर पुरातत्व विभाग भारत सरकार इजाज़त देगा तो उनको मरम्मत करने में कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने इंटेक से भी  बात की है।

हमारा कहना है कि अगर सरकार नहीं कर सकती तो बता दे वरना दिल्ली सरकार हो, केंद्र सरकार हो, वक़्फ़ बोर्ड हो और जो मदद करना चाहते हैं वह भी शामिल हो सकते हैं क्यूंकि इसमें बहुत सरमाये की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि बारिश में अब पानी गुंबद से होता हुआ नीचे तक आ जाता है। बहुत ज़्यादा ख़तरा हो गया है। उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद ने कभी कोई अवामी चंदा नहीं किया और न करना चाहता है लेकिन इस इमारत को बचाना है , यह हमारी ज़िम्मेदारी है। बहर हाल जब टीम ने देखा तो वाक़ई अंदाज़ा हुआ कि अगर जल्द मरम्मत न कराई गई तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता है और मस्जिद गिर सकती है।

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