पंजाब में कोयला की सप्लाई ठप होने से बिजली संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने का वक्त मांगा था, लेकिन मुलाकात के लिए समय नहीं मिलने से नाराज़ अमरिंद सिंह जंतर मंतर पर धरना देंगे।
मालगाडि़यां बंद रहने से राज्य में थर्मल पावर प्लांटाें को कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे बिजली उत्पादन ठप हाे गया है। इसके साथ ही राज्य में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। अब इसकी वजह से राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ता नज़र आ रहा है।
इसके साथ ही पंजाब से सब्जियों और अनाज की सप्लाई भी नहीं हाे पा रही है। इसकी संबंध में ही राज्य का शिष्टमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद से मिलना चाहता था, लेकिन इसके लिए समय नहीं मिला।
गौरतलब है कि पंजाब में सरकारी और निजी मिलाकर कुल पांच थर्मल प्लांट हैं। इनमें से चार पहले ही बंद हो चुके थे। पंजाब में अब लम्बे बिजली कट हो सकते हैं। राज्य सरकार अन्य संसाधनों से बिजली ख़रीदकर पंजाब की पावर सप्लाई बहाल रख रही है।
सरकार का कहना है कि रेल मंत्रालय के माल गाड़ियां शुरू ना करने से यह नौबत आई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि कोयला की कमी से आख़िरी GVK थर्मल प्लांट भी बंद हो गया है।
राज्य की हालत की ओर ध्यान दिलाने के उद्देश्य से दिल्ली में जंतर मंतर पर एक दिन के सांकेतिक धरना देने का फैसला किया गया है। वह सुबह 10.30 बजे धरने में पहले बैच का नेतृत्व करेंगे। कैप्टन अमरिंदर ने अन्य पंजाब पार्टियों के विधायकों से भी राज्य के हित में धरने में शामिल होने की अपील की।
आपको बता दें कि केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के किसान कुछ ट्रेन की पटरियों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में किसानों के थर्मल पावर प्लांटों की ओर जाने वाले रेलवे ट्रैक को कई जगह जाम करने के बाद रेलवे ने राज्य में मालगाडियों का परिचालन बंद कर दिया था।
रेलवे ने अब इस रोक को 7 नवंबर तक बढ़ा दिया है। इससे पंजाब में थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की आपूर्ति बंद हो गई है और बिजली उत्पादन बंद हो गया है। इससे पूरे पंजाब में ब्लैक आउट का खतरा पैदा हो गया है।