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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में प्रमोद तिवारी ने राजा भैया का साथ देने का किया ऐलान, प्रतापगढ़ में नई सियासी इबारत लिखने की तैयारी?

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव अपने सियासी उफान पर है। बीजेपी इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा मान कर लड़ रही है। सूबे के 25 जिले ऐसे हैं, जहां बीजेपी उम्मीदवार के सामने कोई भी उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल नहीं किया है। ऐसे में उन जिलों में प्रत्याशी निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित हो चुके हैं। इन सब के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रतापगढ़ उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां बीजेपी का अब तक खाता नहीं खुला है।

आपको बता दें कि साल 2010 का चुनाव छोड़ दें तो 1995 से लेकर चार बार जिला पंचायत के चुनाव हुए और इन चुवानों में रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का ही जादू चला। सूबे में इस बार बीजेपी की सरकार होने के नाते पहली बार जिला पंचायत की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए जोर आजमाइश कर रही है जबकि सपा सबसे बड़ी पार्टी है और कांग्रेस किंगमेकर की भूमिका में है। इस स्थिति में प्रमोद तिवारी ने राजा भैया के साथ हाथ मिलाकर सपा और बीजेपी रोकने के साथ-साथ जिले में नई सियासी इबारत लिखने के भी संकेत दे दिए हैं।

प्रतापगढ़ जिला से पंचायत अध्यक्ष के लिए बीजेपी ने क्षमा सिंह अपना उम्मीदवार घोषित किया है। जबकि सपा ने अमरावती देवी को मैदान में उतारा है। वहीं, राजा भैया ने अपनी जनसत्ता पार्टी से माधरी पटेल को उम्मीदवार बनाया है। इस तरह से प्रतापगढ़ में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए त्रिकोणीय मुकाबला है। ऐसे में सबके अहम भूमिका में जिले के कद्दावर कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी आ गए हैं।

यहां के गणित को देखें तो जिला पंचायत के कुल 57 सदस्य है, जिनमें से सबसे ज्यादा 17 सदस्य सपा के जीतकर आए हैं। जनसत्ता पार्टी से 11 सदस्य जीते हैं जबकि बीजेपी के महज 7 सदस्य जीते हैं। इसके अलावा 5 सदस्य कांग्रेस के जीते हैं और 17 अन्य जीते हैं। अन्य में बसपा, निर्दलीय, आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा करने के लिए 29 सदस्यों के बहुमत की जरूरत है।

हाल ही में बसपा ने पहले ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से अपने को अलग कर लिया है। ऐसे में चुनाव से पहले सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए सियासी दिग्गजों में खींचतान मची है। प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय सदस्यों में से 7 सदस्यों को अपने साथ मिला लिया है, जिसके चलते अब उनके पास कुल संख्या 12 हो गई है। बीजेपी के दिग्गज नेता भी डेरा डाले हुए हैं।

प्रमोद तिवारी-राजा भैया साथ आए

साल 2011 में प्रमोद कुमार मौर्या को अध्यक्ष बनवाने में भी प्रमोद तिवारी का अहम योगदान था। सपा समर्थित प्रत्याशी घनश्याम यादव को रोकने के लिए प्रमोद तिवारी ने पूरी ताकत झोंक दी थी,  उनके प्रयास से ही क्षेत्रीय दलों ने एकजुट होकर बसपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार मौर्य को जीत दर्ज कराई थी। इस बार चुनाव में प्रमोद तिवारी ने राजा भैया के जनसत्ता दल को समर्थन का ऐलान कर दिया है।

प्रमोद तिवारी के समर्थन के बाद राजा भैया की जनसत्ता पार्टी के उम्मीदवार माधरी पटेल का सियासी पल्ला काफी भारी हो गया है. जनसत्ता पार्टी के 11 सदस्य है और प्रमोद तिवारी के 12 सदस्यों के बाद यह आंकड़ा 23 पर पहुंच गया है। इसके अलावा राजा भैया ने पिछले दिनों जिले विश्वनाथगंज के अपना दल (एस) के विधायक आरके वर्मा के घर गए थे, जिसके बाद माना जा रहा है उनके समर्थन से जीते दो सदस्य भी साथ आ सकते हैं। इस तरह से राजा भैया के प्रत्याशी के जीत की राह आसान होती नजर आ रही है। प्रतापगढ़ की सियासत में राजा भैया का दबदबा पिछले ढ़ाई दशक से है।

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